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Shivangi Shivi
ab shaayad vo baat nahin
ab shaayad vo baat nahin | अब शायद वो बात नहीं
- Shivangi Shivi
अब
शायद
वो
बात
नहीं
सावन
में
बरसात
नहीं
सड़कों
पर
तो
काँटें
हैं
कोई
साफ़
सिरात
नहीं
आँखों
में
देखा
उसके
मेरे
लिए
जज़्बात
नहीं
कैसे
मैं
तकबीर
करूँँ
जब
कोई
मिरआत
नहीं
- Shivangi Shivi
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उसकी
जुल्फ़ें
उदास
हो
जाए
इस-क़दर
रोशनी
भी
ठीक
नहीं
तुमने
नाराज़
होना
छोड़
दिया
इतनी
नाराज़गी
भी
ठीक
नहीं
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Fahmi Badayuni
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हमारे
लोग
अगर
रास्ता
न
पाएँगे
शिलाएँ
जोड़
के
पानी
पे
पुल
बनाएँगे
फिर
एक
बार
मनेगी
अवध
में
दीवाली
फिर
एक
बार
सभी
रौशनी
में
आएँगे
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Amit Jha Rahi
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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ज़िंदा
हूँ
इस
तरह
कि
ग़म-ए-ज़िंदगी
नहीं
जलता
हुआ
दिया
हूँ
मगर
रौशनी
नहीं
Behzad Lakhnavi
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लड़कियाँ
बैठी
थीं
पाँव
डालकर
रौशनी
सी
हो
गई
तालाब
में
Parveen Shakir
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अब
तो
ख़ुद
अपने
ख़ून
ने
भी
साफ़
कह
दिया
मैं
आपका
रहूॅंगा
मगर
उम्र
भर
नहीं
Aalok Shrivastav
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तो
देख
लेना
हमारे
बच्चों
के
बाल
जल्दी
सफ़ेद
होंगे
हमारी
छोड़ी
हुई
उदासी
से
सात
नस्लें
उदास
होंगी
Danish Naqvi
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यह
जानते
हैं
हम
या
ख़ुदा
जानता
है
बस
कैसे
निकल
के
आए
हैं
उस
तीरगी
से
हम
Amaan Pathan
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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ख़्वाब
अधूरा
रह
जाएगा
बिन
बोले
वो
कह
जाएगा
बंद
करो
आँखों
को
वरना
पानी
सारा
बह
जाएगा
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Shivangi Shivi
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सूरज
धूप
लिए
फिरता
है
रोज़
ज़मीं
पर
ये
गिरता
है
करने
शोर
मिरे
घावों
पे
ये
बादल
मुझ
पर
घिरता
है
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Shivangi Shivi
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आज
समाँ
कुछ
ऐसा
है
पिछले
बरसों
जैसा
है
ख़ूब
बहुत
है
बाहरस
जाने
ये
दिल
कैसा
है
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Shivangi Shivi
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दर्द
हुआ
है
हल्का-हल्का
ये
तो
बढ़ता
जाएगा
दिल
में
ऐसी
आग
लगी
है
कौन
बुझा
ही
पाएगा
Shivangi Shivi
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दिल
टूटा
जैसे
शीशा
हो
शीशे
भी
रोया
करते
हैं
Shivangi Shivi
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