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Shivangi Shivi
suraj dhoop li.e firta hai
suraj dhoop li.e firta hai | सूरज धूप लिए फिरता है
- Shivangi Shivi
सूरज
धूप
लिए
फिरता
है
रोज़
ज़मीं
पर
ये
गिरता
है
करने
शोर
मिरे
घावों
पे
ये
बादल
मुझ
पर
घिरता
है
- Shivangi Shivi
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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मैं
बे-ख़याल
कभी
धूप
में
निकल
आऊँ
तो
कुछ
सहाब
मिरे
साथ
साथ
चलते
हैं
Farhat Abbas Shah
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आग
उगलती
रातों
में
इक
शीतलता
सी
छायी
थी
गर्मी
की
छुट्टी
में
फिर
वो
मामा
के
घर
आई
थी
Shubham Seth
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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शदीद
गर्मी
में
कैसे
निकले
वो
फूल-चेहरा
सो
अपने
रस्ते
में
धूप
दीवार
हो
रही
है
Shakeel Jamali
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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जब
से
तुम
से
प्यार
हुआ
वादे
ख़ूब
निभाए
हैं
तारे
क्या
आसमान
से
हम
चाँद
तोड़
लाए
हैं
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Shivangi Shivi
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ताबीरों
को
ताबानी
दे
मौला
इस
शायर
को
नादानी
दे
मौला
Shivangi Shivi
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आँखों
से
ये
कहना
है
बरसातें
अब
बंद
करो
Shivangi Shivi
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अब
शायद
वो
बात
नहीं
सावन
में
बरसात
नहीं
सड़कों
पर
तो
काँटें
हैं
कोई
साफ़
सिरात
नहीं
आँखों
में
देखा
उसके
मेरे
लिए
जज़्बात
नहीं
कैसे
मैं
तकबीर
करूँँ
जब
कोई
मिरआत
नहीं
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Shivangi Shivi
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मन
अपना
मन
मानी
है
काहे
की
हैरानी
है
काग़ज़
की
ये
कश्ती
है
स्याही
का
ये
पानी
है
आँखों
में
गहराई
है
हरकत
इक
नादानी
है
देखी
जो
बरसों
पहले
सूरत
ये
पहचानी
है
प्यार
नहीं
सस्ता
होता
ये
तो
अमर
रूहानी
है
बिंदी
उसकी
सुंदर
है
पत्थर
की
पेशानी
है
चाँद
में
जिसको
देखा
है
चेहरा
वो
नूरानी
है
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Shivangi Shivi
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