koi kya hogaa jahaan men jis qadar paagal hooñ main | कोई क्या होगा जहाँ में जिस क़दर पागल हूँ मैं

  - SHIV SAFAR
कोईक्याहोगाजहाँमेंजिसक़दरपागलहूँमैं
देखकरतुमकहपाओगेमगरपागलहूँमैं
अबबहुतजल्दीहीमैंमशहूरहोनेवालाहूँ
देखोअबकहनेलगीहैहरनज़रपागलहूँमैं
मेराहुलिया,मेरेकपड़े,मेरीआँखेंदेखकर
लाज़िमीहैहोनासबकोमुझसेेडरपागलहूँमैं
फ़ासलेमुझसेेबढ़ासकतेहोतुमभीशौक़से
क्याख़तामेरीहैइस
मेंअबअगरपागलहूँमैं
मैंबरीहोजाऊॅंगाहरइकसज़ासेइसलिए
सारेइल्ज़ामातलाकेमुझपेधरपागलहूँमैं
'अक़्लकेअंधेबादलकररहेहोक्याउधर
बिजलीकेझटकेमुझेदोयाँइधरपागलहूँमैं
चाहकरभीमैंकिसीकाहोनहींसकताहूँअब
कैसीदुनिया,कैसेअपने,कैसाघरपागलहूँमैं
कौनमानेमेरीअबआज़ादहैतेरीहवस
साथमेरेजैसाचाहेवैसाकरपागलहूँमैं
या'नीपूरेहोशमेंअबचुकाहैइसलिए
ख़ुद-ब-ख़ुदबकनेलगाहै‘शिवसफ़र’पागलहूँमैं
  - SHIV SAFAR
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