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shaan manral
mere uljhe se khayaalon men kahii basti ho
mere uljhe se khayaalon men kahii basti ho | मेरे उलझे से ख़यालों में कहीं बसती हो
- shaan manral
मेरे
उलझे
से
ख़यालों
में
कहीं
बसती
हो
सोच
कर
तुम
को
मिरा
वक़्त
निकल
जाता
है
- shaan manral
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उस
वक़्त
का
हिसाब
क्या
दूँ
जो
तेरे
बग़ैर
कट
गया
है
Ahmad Nadeem Qasmi
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कुछ
कहने
का
वक़्त
नहीं
ये
कुछ
न
कहो
ख़ामोश
रहो
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
हाँ
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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जी
चाहता
है
एक
यही
काम
करने
को
मैं
अपने
दिल
का
हाल
ग़ज़ल
में
समेट
लूँ
वैसे
तुम्हारे
बारे
में
क्या
सोचता
हूँ
मैं
कह
दो
तो
वो
ख़याल
ग़ज़ल
में
समेट
लूँ
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shaan manral
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उस
पे
यक़ीं
न
करते
हुए
भी
करेंगे
सब
मासूम
शक्ल
से
जो
कहानी
बताएगी
shaan manral
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ज़िक्र
उठा
जब
तेरा
सब
यादों
की
परतें
खुलती
गई
और
मैं
मान
रहा
था
सालों
से
कि
तुझे
मैं
भूल
गया
shaan manral
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कब
तक
शदीद
दर्द
उठाए
फिरेंगे
हम
अब
ख़ुशियों
के
कपाट
को
खुल
जाना
चाहिए
shaan manral
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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