aap naahak hi zulm dhhaate hain | आप नाहक़ ही ज़ुल्म ढाते हैं

  - shaan manral
आपनाहक़हीज़ुल्मढातेहैं
औरहमहैंकिमुस्कुरातेहैं
तीरपेतीरछोड़तेहैंआप
फिरजिगरकोभीआज़मातेहैं
आपहैंला-जवाबशा'इरदोस्त
हरकिसीकोपसंदआतेहैं
मौसमोंकीललकमेंक्यारोना
येतोआतेहैंऔरजातेहैं
ज़ख़्मतोभरगएसभीदिल
चलनयाएकज़ख़्मखातेहैं
पापकामैलमनसेधोनेको
लोगगंगामेंजानहातेहैं
येकहानीभीख़ूबहैअपनी
आँखमेंअश्कझिलमिलातेहैं
कामकितनेहीरहगएबाक़ी
आप'शेखर'ग़ज़लसुनातेहैं
  - shaan manral
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