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shaan manral
kaatte ped bhala kaise ham
kaatte ped bhala kaise ham | काटते पेड़ भला कैसे हम
- shaan manral
काटते
पेड़
भला
कैसे
हम
घोंसला
तोड़
न
पाए
हम
तो
- shaan manral
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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तेरे
लगाए
हुए
ज़ख़्म
क्यूँँ
नहीं
भरते
मेरे
लगाए
हुए
पेड़
सूख
जाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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बिछड़
के
तुझ
सेे
न
देखा
गया
किसी
का
मिलाप
उड़ा
दिए
हैं
परिंदे
शजर
पे
बैठे
हुए
Adeem Hashmi
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साया
है
कम
खजूर
के
ऊँचे
दरख़्त
का
उम्मीद
बाँधिए
न
बड़े
आदमी
के
साथ
Kaif Bhopali
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है
दुख
तो
कह
दो
किसी
पेड़
से
परिंदे
से
अब
आदमी
का
भरोसा
नहीं
है
प्यारे
कोई
Madan Mohan Danish
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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कुछ
दिनों
से
अजब
ख़ुमारी
है
हो
न
हो
हम
पे
हुस्न
तारी
है
अंजुमन
के
उदास
लोगों
से
आज
कल
दोस्ती
हमारी
है
जिस्म
ने
तो
निकाह
कर
ली
पर
रूह
अब
भी
मेरी
कुँवारी
है
सादगी
और
हुस्न
वालों
में
हुस्न
वालों
का
इश्क़
भारी
है
तू
ने
आख़िर
चुना
भी
तो
उस
को
जो
तेरे
जिस्म
का
पुजारी
है
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shaan manral
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तस्वीर
अर्से
बाद
बदलती
है
सब्र
रख
ऐसा
नहीं
न
होता
कि
सोचा
बदल
गया
shaan manral
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है
इस
हसीन
शौक़
में
लज़्ज़त
छुपी
हुई
बहला
रहे
हैं
ख़ुद
को
मियाँ
शा'इरी
से
हम
shaan manral
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रिश्ता
हमारे
बीच
में
वैसा
नहीं
रहा
अब
जान
शान
देने
का
जज़्बा
नहीं
रहा
अब
एक
दूसरे
से
अलग
होना
ठीक
है
अब
एक
दूसरे
पे
भरोसा
नहीं
रहा
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shaan manral
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मेरी
तो
तुझ
से
सिर्फ़
मोहब्बत
की
माँग
थी
क्या
मिल
गया
तुझे
मेरी
इज़्ज़त
उछाल
कर
shaan manral
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