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Dipanshu Shams
hain doston men bahut khaas dost apne do
hain doston men bahut khaas dost apne do | हैं दोस्तों में बहुत ख़ास दोस्त अपने दो
- Dipanshu Shams
हैं
दोस्तों
में
बहुत
ख़ास
दोस्त
अपने
दो
हम
उन
को
प्यार
से
दुख-सुख
बुलाया
करते
हैं
- Dipanshu Shams
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तमाशे
के
लिए
उसको
फ़क़त
इंसाँ
जुटाने
हैं
मदारी
जानता
है
ये
ज़माना
पागलों
का
है
Dipanshu Shams
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पक्का
है
इंतिज़ाम
ज़रा
इंतिज़ार
कर
लेंगे
ये
इंतिक़ाम
ज़रा
इंतिज़ार
कर
सय्याद
बुन
रखा
है
परिंदों
ने
अब
की
जाल
होगा
तू
ज़ेर-ए-दाम
ज़रा
इंतिज़ार
कर
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Dipanshu Shams
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टूटे
हैं
हाथ
पाँव
कई
इन
की
वजह
से
बिगड़ा
न
बे-लगाम
ज़ुबानों
का
कुछ
मगर
Dipanshu Shams
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नाज़-नख़रे
रूप
सारे
बेह्तरीन
जान!
लगते
हैं
तुम्हारे
बेह्तरीन
जोश
में
पढ़ने
लगा
सुनते
ही
मैं
वाह
वा!
क्या
बात,
प्यारे
बेह्तरीन
बस
करो
जाँ
अब
हया
थक
जाएँगे
कहते-कहते
चाँद-तारे
बेह्तरीन
इश्क़
में
नुकसान
का
क्या
सोचना
इस
में
होते
हैं
ख़सारे
बेह्तरीन
रक़्स
लहरों
का
नदी
में
देखकर
कह
उठे
दोनों
किनारे
बेह्तरीन
यादे-माज़ी
आई
तो
बोला
ये
दिल
दिन
थे,
बचपन
के
हमारे
बेह्तरीन
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Dipanshu Shams
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हूँ
तेरी
साँसों
की
दरकार
राएगाँ
न
समझ
दरख़्त
मैं
हूँ
हवा-दार
राएगाँ
न
समझ
न
ऊब
दोस्त
सुकूँ
की
लुका-छुपी
से
अभी
है
खेल
ख़ूब
मज़ेदार
राएगाँ
न
समझ
जुनून-ए-इश्क़
को
समझे
है
राएगाँ
दुनिया
ख़ुदारा
तू
तो
मेरे
यार
राएगाँ
न
समझ
क़ुसूर-वार
हैं
हम
ग़लतियाँ
हमारी
थीं
तू
ख़ुद
को
बीच
की
दीवार
राएगाँ
न
समझ
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Dipanshu Shams
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