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Dipanshu Shams
hooñ teri saanson ki darkaar raayegaan na samajh
hooñ teri saanson ki darkaar raayegaan na samajh | हूँ तेरी साँसों की दरकार राएगाँ न समझ
- Dipanshu Shams
हूँ
तेरी
साँसों
की
दरकार
राएगाँ
न
समझ
दरख़्त
मैं
हूँ
हवा-दार
राएगाँ
न
समझ
न
ऊब
दोस्त
सुकूँ
की
लुका-छुपी
से
अभी
है
खेल
ख़ूब
मज़ेदार
राएगाँ
न
समझ
जुनून-ए-इश्क़
को
समझे
है
राएगाँ
दुनिया
ख़ुदारा
तू
तो
मेरे
यार
राएगाँ
न
समझ
क़ुसूर-वार
हैं
हम
ग़लतियाँ
हमारी
थीं
तू
ख़ुद
को
बीच
की
दीवार
राएगाँ
न
समझ
- Dipanshu Shams
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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ज़रा
विसाल
के
बाद
आइना
तो
देख
ऐ
दोस्त
तिरे
जमाल
की
दोशीज़गी
निखर
आई
Firaq Gorakhpuri
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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टूटते
रिश्तों
से
बढ़कर
रंज
था
इस
बात
का
दरमियाँ
कुछ
दोस्त
थे,
और
दोस्त
भी
ऐसे,
के
बस
Renu Nayyar
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
Mehshar Afridi
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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तिरे
लबों
में
मिरे
यार
ज़ाइक़ा
नहीं
है
हज़ार
बोसे
हैं
उन
पर
प
इक
दु'आ
नहीं
है
Pallav Mishra
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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अब
कारगह-ए-दहर
में
लगता
है
बहुत
दिल
ऐ
दोस्त
कहीं
ये
भी
तिरा
ग़म
तो
नहीं
है
Majrooh Sultanpuri
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गर्मी
की
सुब्ह-सुब्ह
की
ठंडी
हवा
हो
तुम
इस
लू
लगे
मरीज़
की
जाना
शिफ़ा
हो
तुम
जिस
को
में
हँसते-हँसते
करूँँ
शौक़
से
क़ुबूल
ऐसे
ही
एक
जुर्म
की
प्यारी
सज़ा
हो
तुम
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Dipanshu Shams
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हुई
है
नज़्म
सनम
नज़्म
का
ये
है
उनवान
हसीन
नज़्म
हो
तुम
बेहतरीन
शाइर
की
Dipanshu Shams
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हार
की
जीत
हो
गई
होती
मैं
अगर
टूट
के
बिखर
जाता
Dipanshu Shams
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इस
तेरे
मेरे
के
झगड़े
में
केवल
रिश्ते
छलनी
होते
हैं
Dipanshu Shams
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चाँद-तारे,
फ़िज़ा-धनक
देखूँ
सब
में
महबूब
की
झलक
देखूँ
शोख़
नज़रें
हसीं
बदन
है
मगर
सिर्फ़
तस्वीर
कब
तलक
देखूँ
दो
मुझे
तितलियाँ
सी
लगती
हैं
जब
झपकती
तिरी
पलक
देखूँ
बज़्म
में
लाख़
हों
सितारे
पर
मैं
फ़क़त
अपने
की
चमक
देखूँ
याद-ए-कूचा-ए-यार
आती
है
जब
कभी
फिल्म
मैं
'धड़क'
देखूँ
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Dipanshu Shams
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