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Dipanshu Shams
Bachpan ke sath mauj o ravani chali gyi
बचपन के साथ मौज-ओ-रवानी चली गई
- Dipanshu Shams
बचपन
के
साथ
मौज-ओ-रवानी
चली
गई
शादी
के
बाद
शाम
सुहानी
चली
गई
बच्चे
की
देख-भाल
कमाने
की
फ़िक्र
में
कितनी
ही
लड़कियों
की
जवानी
चली
गई
- Dipanshu Shams
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मुठ्ठी
से
रेत
को
न
फिसलने
दो
पहले
आप
फिर
शौक़
से
हुज़ूर
बड़े
ख़्वाब
देखना
Dipanshu Shams
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हैं
दोस्तों
में
बहुत
ख़ास
दोस्त
अपने
दो
हम
उन
को
प्यार
से
दुख-सुख
बुलाया
करते
हैं
Dipanshu Shams
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क्यूँँ
लिखा
बद-नसीब
क़िस्मत
में
बीते
दिन-रात
इस
शिकायत
में
सिर्फ़
ख़ुद
को
ग़लत
न
समझे
आप
भूल
होती
है
सब
से
उजलत
में
यूँँ
मगन
हूँ
मैं
सोच
में
उसकी
जैसे
मज़दूर
कोई
मेहनत
में
राम
सीता
ने
लाज
रक्खी
बस
हम
से
क्या
हो
सका
मुहब्बत
में
ज़ख़्म
के
दर्द
से
ज़ियादा
दर्द
हम
ने
झेला
है
राह-ए-उल्फ़त
में
रोज़
कहता
है
फ़ालतू
इक
बात
कल
करूँँगा
ये
काम
फ़ुर्सत
में
रह
न
पाना
किसी
के
बिन
रहना
फ़र्क़
इतना
है
लत
और
आदत
में
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Dipanshu Shams
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तकनीक
राएगाँ
हुई
इंजीनियर
की
सब
तस्वीर
में
चमक
थी
मगर
था
उदास
मैं
Dipanshu Shams
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एक
ही
शय
फ़क़त
नज़र
ढूॅंढे
आदमियत
भरा
बशर
ढूॅंढे
पत्ते-पत्ते
में
प्यार
हो
जिसके
दिल
का
पंछी
वही
शजर
ढूॅंढे
फ़न
है
उसकी
ज़बान
में
और
वो
नासमझ
हाथ
में
हुनर
ढूॅंढे
ख़ुद
में
ही
तू
तो
एक
लावा
है
आग
फिर
क्यूँँ
इधर
उधर
ढूॅंढे
मंज़िलों
तक
नहीं
पहुँचता
वो
सिर्फ़
आसान
जो
डगर
ढूॅंढे
हाँ
ख़ुदा
भी
दिखेगा
तब
तुझको
अपने
माँ-बाप
में
अगर
ढूॅंढे
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Dipanshu Shams
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