एक ही शय फ़क़त नज़र ढूॅंढे

  - Dipanshu Shams
एकहीशयफ़क़तनज़रढूॅंढे
आदमियतभराबशरढूॅंढे
पत्ते-पत्तेमेंप्यारहोजिसके
दिलकापंछीवहीशजरढूॅंढे
फ़नहैउसकीज़बानमेंऔरवो
नासमझहाथमेंहुनरढूॅंढे
ख़ुदमेंहीतूतोएकलावाहै
आगफिरक्यूँँइधरउधरढूॅंढे
मंज़िलोंतकनहींपहुँचतावो
सिर्फ़आसानजोडगरढूॅंढे
हाँख़ुदाभीदिखेगातबतुझको
अपनेमाँ-बापमेंअगरढूॅंढे
  - Dipanshu Shams
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