hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shadab Shabbiri
dehr ki bas yahiin haqeeqat hai
dehr ki bas yahiin haqeeqat hai | दह्र की बस यहीं हक़ीक़त है
- Shadab Shabbiri
दह्र
की
बस
यहीं
हक़ीक़त
है
कुछ
नहीं
है
यहाँ
हक़ीक़त
में
- Shadab Shabbiri
Download Sher Image
दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
Send
Download Image
92 Likes
मेरे
सीने
में
नहीं
तो
तेरे
सीने
में
सही
हो
कहीं
भी
आग
लेकिन
आग
जलनी
चाहिए
Dushyant Kumar
Send
Download Image
52 Likes
रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
34 Likes
ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
29 Likes
सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
Read Full
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
83 Likes
इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
Send
Download Image
27 Likes
कैसे
दिल
का
हाल
सही
हो
सकता
है
जब-तब
यूँँ
तुम
साड़ी
में
दिख
जाओगी
Tanha
Send
Download Image
2 Likes
अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
Send
Download Image
11 Likes
कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
Send
Download Image
30 Likes
लहजा
ही
थोड़ा
तल्ख़
है
दुनिया
के
सामने
वैसे
तो
ठीक
ठाक
हूँ
मैं
बोल-चाल
में
Ankit Maurya
Send
Download Image
44 Likes
Read More
क़ाएम
रहे
उसूल
पे
दोनों
अख़ीर
तक
मैं
भी
अना
परस्त
था
ग़ैरत
उसे
भी
थी
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
चार
सू
ग़म
की
आग
फैली
थी
मोम
जैसा
पिघल
गया
हूँ
मैं
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
ख़ुदा-ए-पाक
ने
बख़्शा
है
वो
हुनर
शादाब
मैं
अपने
दर्द
को
ग़ज़लों
में
ढ़ाल
सकता
हूँ
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
कुछ
तबीयत
मिरी
बेज़ार
अगर
है
तो
है
सर
पे
लटकी
हुई
तलवार
अगर
है
तो
है
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
1 Like
तिरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
मैं
हाल-ए-दिल
सुनाना
चाहता
हूँ
तुझे
अपना
बनाना
चाहता
हूँ
मैं
जीने
का
बहाना
चाहता
हूँ
यहीं
कश्ती
जलाना
चाहता
हूँ
हुकूमत
फ़ातिहाना
चाहता
हूँ
मैं
इक
दर्पण
दिखाना
चाहता
हूँ
तुझे
तुझ
से
मिलाना
चाहता
हूँ
फ़साने
को
हक़ीक़त
में
बदल
कर
हक़ीक़त
सा
फ़साना
चाहता
हूँ
ठिकाने
तो
कई
मिल
जाएँ
लेकिन
तिरे
दिल
में
ठिकाना
चाहता
हूँ
ज़रा
कुछ
और
मोहलत
दे
मुझे
तू
मैं
हर
वा'दा
निभाना
चाहता
हूँ
मिरे
अश'आर
रूमानी
हैं
लेकिन
मैं
तेवर
बाग़ियाना
चाहता
हूँ
Read Full
Shadab Shabbiri
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Valentine Shayari
Eid Shayari
Wafa Shayari
Khafa Shayari
Breakup Motivation Shayari