तिरे नज़दीक आना चाहता हूँ

  - Shadab Shabbiri
तिरेनज़दीकआनाचाहताहूँ
मैंहाल-ए-दिलसुनानाचाहताहूँ
तुझेअपनाबनानाचाहताहूँ
मैंजीनेकाबहानाचाहताहूँ
यहींकश्तीजलानाचाहताहूँ
हुकूमतफ़ातिहानाचाहताहूँ
मैंइकदर्पणदिखानाचाहताहूँ
तुझेतुझसेमिलानाचाहताहूँ
फ़सानेकोहक़ीक़तमेंबदलकर
हक़ीक़तसाफ़सानाचाहताहूँ
ठिकानेतोकईमिलजाएँलेकिन
तिरेदिलमेंठिकानाचाहताहूँ
ज़राकुछऔरमोहलतदेमुझेतू
मैंहरवा'दानिभानाचाहताहूँ
मिरेअश'आररूमानीहैंलेकिन
मैंतेवरबाग़ियानाचाहताहूँ
  - Shadab Shabbiri
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