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SHABAB ANWAR
uski itni haseen soorat hai
uski itni haseen soorat hai | उसकी इतनी हसीन सूरत है
- SHABAB ANWAR
उसकी
इतनी
हसीन
सूरत
है
देख
कर
चाँद
को
भी
हैरत
है
सादगी
में
जो
ख़ूब-सूरत
है
उसको
सजने
की
क्या
ज़रूरत
है
इक
ज़माना
हुआ
मिले
तुम
सेे
अब
तुम्हें
देखने
की
हसरत
है
प्यार
मुझको
यहाँ
मिले
कैसे
सबके
दिल
में
तो
बैठी
नफ़रत
है
एक
पल
मेरे
बिन
नहीं
रहती
उसकी
भी
ये
अजीब
फ़ितरत
है
- SHABAB ANWAR
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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'हसरत'
की
भी
क़ुबूल
हो
मथुरा
में
हाज़िरी
सुनते
हैं
आशिक़ों
पे
तुम्हारा
करम
है
आज
Hasrat Mohani
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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तुझ
से
सौ
बार
मिल
चुके
लेकिन
तुझ
से
मिलने
की
आरज़ू
है
वही
Jaleel Manikpuri
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तुम्हारी
याद
में
जीने
की
आरज़ू
है
अभी
कुछ
अपना
हाल
सँभालूँ
अगर
इजाज़त
हो
Jaun Elia
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न
जी
भर
के
देखा
न
कुछ
बात
की
बड़ी
आरज़ू
थी
मुलाक़ात
की
Bashir Badr
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इक
नई
क़िस्म
तलाशी
गई
है
फूलों
की
मेरी
हसरत
है
उसे
नाम
तुम्हारा
मिल
जाए
Vishnu virat
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मुझ
को
ये
आरज़ू
वो
उठाएँ
नक़ाब
ख़ुद
उन
को
ये
इंतिज़ार
तक़ाज़ा
करे
कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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ऐसी
भी
कोई
शाम
हो
जिस
में
तू
हम-कलाम
हो
उकता
गया
सभी
से
मैं
कब
ज़िन्दगी
तमाम
हो
हो
नाम
बाद
मरने
के
सो
ऐसा
कोई
काम
हो
लानत
हो
ऐसे
काम
में
जो
धर्म
में
हराम
हो
दिन
गुज़रा
उसकी
याद
में
अब
शाम
तेरे
नाम
हो
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SHABAB ANWAR
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हो
गया
रुस्वा
वो
पहले
ही
इश्क़
में
सो
वफ़ा
भी
उसे
अब
जफ़ा
लगती
है
SHABAB ANWAR
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न
हो
राह
में
कोई
आफ़त
अगर
तो
फिर
तुम
सही
रास्ते
पर
नहीं
क़दम
तो
बढ़ाना
पड़ेगा
तुम्हें
यहाँ
मिलता
कुछ
सोचने
पर
नहीं
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SHABAB ANWAR
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नसीब
अपना
किस
तरह
बनाएँ
हम
लकीरें
हाथ
की
किसे
दिखाएँ
हम
यही
तलब
है
हम
सेे
घर
के
लोगों
की
कहीं
से
रोज़
धन
कमा
के
लाएँ
हम
हमारे
बाप
ने
भी
कल
ये
कह
दिया
तुम्हारा
बोझ
कितना
और
उठाएँ
हम
जतन
इसी
के
वास्ते
है
कैसे
अब
गरीबी
के
चराग़
को
बुझाएँ
हम
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SHABAB ANWAR
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जो
कहा
मैंने
उसने
सुना
ही
नहीं
फ़ैसला
मेरे
हक़
में
हुआ
ही
नहीं
वैसे
तो
मिल
गई
सारी
चीज़ें
मुझे
जो
मगर
चाहिए
था
मिला
ही
नहीं
देख
कर
मुझको
उसने
छुपा
ली
नज़र
जैसे
उस
सेे
मिरा
राब्ता
ही
नहीं
उसने
दुनिया
लुटा
दी
मिरे
वास्ते
मैंने
उसके
लिए
कुछ
किया
ही
नहीं
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SHABAB ANWAR
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