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Satyam Shukla
kal yah rishta badnaam na ho
kal yah rishta badnaam na ho | कल यह रिश्ता बदनाम न हो
- Satyam Shukla
कल
यह
रिश्ता
बदनाम
न
हो
बेहतर
है
इसका
नाम
न
हो
यह
सोच
के
उसका
काम
किया
कल
मुझको
उस
सेे
काम
न
हो
क्या
आज
से
पीना
छोड़
दिया
इस
बात
पे
फिर
क्यूँ
जाम
न
हो
उन
लबों
का
हश्र
ख़ुदा
जाने
जिन
लबों
पे
जय
श्री
राम
न
हो
इस
वक़्त
को
जी
भर
जी
लो
तुम
शायद
फिर
ऐसी
शाम
न
हो
- Satyam Shukla
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
Neeraj Neer
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ले
साँस
भी
आहिस्ता
कि
नाज़ुक
है
बहुत
काम
आफ़ाक़
की
इस
कारगह-ए-शीशागरी
का
Meer Taqi Meer
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हम
इश्क़
के
मारों
का
इतना
ही
फ़साना
है
रोने
को
नहीं
कोई
हँसने
को
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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हमारे
साँस
भी
ले
कर
न
बच
सके
अफ़ज़ल
ये
ख़ाक-दान
में
दम
तोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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ख़ाक
हो
जाएँगे
हम
ख़ाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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गर
सज़ा
में
उम्र
भर
की
बा-मशक़्क़त
क़ैद
है
जुर्म
भी
फिर
इश्क़
सा
संगीन
होना
चाहिए
Satyam Shukla
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मुहब्बत
मर
तो
जाती
है
फ़क़त
इक
पल
में
ही
लेकिन,
बहुत
तकलीफ़
देती
है
हमें
ये
दफ़्न
होने
तक
Satyam Shukla
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मुझे
औरों
का
ग़म
भी
बाँटना
है
ख़ुदा
मेरे
दुखों
को
ख़त्म
कर
दे
Satyam Shukla
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हमारे
दिल
में
हलचल
कर
रहा
है,
तुम्हारा
इश्क़
पागल
कर
रहा
है
कभी
आगो़श
में
ठहरो
हमारे
नदी
से
बात
जंगल
कर
रहा
है
किसी
के
शे'र
आधे
रह
गए
हैं
कोई
ग़ज़लें
मुकम्मल
कर
रहा
है
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Satyam Shukla
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सफ़र
में
हम
भला
किस
सेे
बिछड़ते
हमारे
साथ
में
कोई
नहीं
था
Satyam Shukla
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