kya gham tha koi aur paraaya hota to | क्या ग़म था कोई और पराया होता तो

  - Santosh singh shekhar
क्याग़मथाकोईऔरपरायाहोतातो
गरबाबूजीकासिरपरसायाहोतातो
मैंअरमानोंकोऊँचालेकरजाताफिर
इकउसपंछीनेसाथनिभायाहोतातो
बारिशमेंअश्केंदेखनहींपातीतुमभी
गरआँखोंनेभीजलबरसायाहोतातो
उसइंसाँनेबदललियारस्ताहीअपना
मैंपीछेहीपरउसकाछायाहोतातो
मैंसकताथातुमतकठुकराकरदुनिया
सुन!तुमनेबसइकबारबुलायाहोतातो
  - Santosh singh shekhar
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