kyun pareshaan ho rahe ho ek chhoti haar se | क्यूँँ परेशाँ हो रहे हो एक छोटी हार से

  - Santosh singh shekhar
क्यूँँपरेशाँहोरहेहोएकछोटीहारसे
एकमकड़ीलड़रहीथीहरदफ़ादीवारसे
कोईतोआवाज़देदेअबमुझेभीप्यारसे
मैंतोतन्हाहोगयाहूँइश्क़मेंइज़हारसे
कृष्णजैसासारथीअबचाहतीहैज़िन्दगी
कामसबबनतेनहींहैंजंगमेंहथियारसे
पीठपीछेआइयेगातबकहींमुमकिनयेहो
चाहतेहैंगरमुझेयूँँजीतनातलवारसे
ज़िन्दगीसेतंगआकरबंदकमरेमेंहूँमैं
तंगआनेलगगयाहूँहिज्रकेकिरदारसे
मैंनेकश्तीभीबहादीबारिशोंकेवस्लमें
मैंनहींअबआनेवालादरियाकेउसपारसे
ज़िन्दगीसेउसनेबाहिरकरदियामौलामुझे
अबकरोतुममुझकोबाहिररूहकेदीवारसे
  - Santosh singh shekhar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy