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Sandeep kushwaha
ye रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और ji.e jaana
ye रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और ji.e jaana | ये रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और जिए जाना
- Sandeep kushwaha
ये
रोना,मुस्कुराना,आह
भरना,और
जिए
जाना
यही
तो
ज़िंदगी
है
ज़िंदगी
कुछ
और
भी
है
क्या
- Sandeep kushwaha
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पहेली
ज़िंदगी
की
कब
तू
ऐ
नादान
समझेगा
बहुत
दुश्वारियाँ
होंगी
अगर
आसान
समझेगा
Zubair Ali Tabish
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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दूसरी
कोई
लड़की
ज़िंदगी
में
आएगी
कितनी
देर
लगती
है
उस
को
भूल
जाने
में
Bashir Badr
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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वो
एक
वक़्त
था
उनको
गुमान
था
हम
पर
ये
एक
वक़्त
है
हम
सेे
नज़र
नहीं
मिलती
Sandeep kushwaha
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एक
ही
बात
का
हमें
डर
है
साँप
के
भेस
में
वो
अजगर
है
जाने
कब
अक्ल
आएगी
उसको
आदमी
है
प
यार
कमतर
है
इश्क़
में
तुमको
डूबना
होगा
इश्क़
दरिया
नहीं
समुंदर
है
चीज़
वो
ही
पसंद
आएगी
अपनी
औकात
से
जो
बाहर
है
तूने
चाहा,
वो
मिल
गया
तुझको
यार
कितना
हसीं
मुक़द्दर
है
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Sandeep kushwaha
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शांत
दरिया
के
पास
बैठा
है
यानी
लड़का
उदास
बैठा
है
होश
दुनिया
को
बाँटता
था
जो
आज
ख़ुद
बद-हवा
से
बैठा
है
वो
जो
दिखता
नहीं
हमें
लेकिन
वो
कहीं
आस-पास
बैठा
है
तृप्त
दिखने
का
ढोंग
मत
करिए
दिल
अगर
ले
के
प्यास
बैठा
है
वो
मेरा
भी
तो
ख़ास
होता
था
जो
तेरा
बन
के
ख़ास
बैठा
है
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Sandeep kushwaha
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बिकने
को
तो
बिकती
है
खु़द्दारी
भी
बस
थोड़ा-सा
रेट
ज़ियादा
करती
है
Sandeep kushwaha
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क़िस्से
सुना
रहा
हूँ
मैं
तुमको
शबाब
के
दिल
हो
गया
था
जब
क़रीं
इक
माहताब
के
वो
जो
शरीफ़
है
तो
है
दुनिया
के
सामने
अरमाँ
मचल
रहें
हैं
मगर
उस
गुलाब
के
ख़ुशबू
गुलों
की
और
कहीं
हो
रहीं
फ़ना
हक़दार
चूमता
रहा
पन्ने
किताब
के
कितनी
मशक़्क़तें
हैं
सितारों
से
पूछिए
रौशन
जो
हो
रहे
हैं
बिना
आफ़ताब
के
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Sandeep kushwaha
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