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Sandeep kushwaha
itni bhi tez aapki aañkhen nahin hain aap
itni bhi tez aapki aañkhen nahin hain aap | इतनी भी तेज़ आपकी आँखें नहीं हैं ,आप
- Sandeep kushwaha
इतनी
भी
तेज़
आपकी
आँखें
नहीं
हैं
,आप
जो
देख
पा
रहें
हैं
हक़ीक़त
नहीं
है
ये
दर
पे
जो
आ
गया
हूँ
तो
ख़िदमत
का
ढोंग
भी
रस्मन
निभा
रहे
हो
तो
ख़िदमत
नहीं
है
ये
- Sandeep kushwaha
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मुझको
ये
नज़र
आया
के
वो
एक
बला
है
कुछ
ख़्वाब
है
कुछ
अस्ल
है
कुछ
तर्ज
-ए-
अदा
है
वो
ग़ैर
की
आग़ोश
में
रहने
लगा
शादाँ
उसको
नहीं
मालूम
के
दिल
मेरा
जला
है
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Navneet krishna
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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एक
ही
बार
नज़र
पड़ती
है
उन
पर
‘ताबिश’
और
फिर
वो
ही
लगातार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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आसमाँ
इतनी
बुलंदी
पे
जो
इतराता
है
भूल
जाता
है
ज़मीं
से
ही
नज़र
आता
है
Waseem Barelvi
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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आइने
सच
कहे
जाने
से
जो
कतराएँगे
भूल
होगी
बड़ी
इक
रोज़
वो
पछताएँगे
राब्ता
टूट
गया
और
वो
सलामत
भी
हैं
हाँ
वही
शख़्स
जो
कहते
थे
कि
मर
जाएँगे
शहर
की
ओर
कमाने
गए
लड़कों
ने
कहा
अबकी
त्यौहार
जो
आएगा
तो
घर
जाएँगे
ज़िंदगी
इश्क़
है
बच्चों
को
सिखाएँ
वरना
ज़िंदगी
जंग
है
जानेंगे
तो
डर
जाएँगे
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Sandeep kushwaha
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शांत
दरिया
के
पास
बैठा
है
यानी
लड़का
उदास
बैठा
है
होश
दुनिया
को
बाँटता
था
जो
आज
ख़ुद
बद-हवा
से
बैठा
है
वो
जो
दिखता
नहीं
हमें
लेकिन
वो
कहीं
आस-पास
बैठा
है
तृप्त
दिखने
का
ढोंग
मत
करिए
दिल
अगर
ले
के
प्यास
बैठा
है
वो
मेरा
भी
तो
ख़ास
होता
था
जो
तेरा
बन
के
ख़ास
बैठा
है
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Sandeep kushwaha
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हुस्न
लुटाएगा
ख़ुशबू
कब
तक
हमने
नदियों
को
भी
जंगल
होते
देखा
है
Sandeep kushwaha
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जुगनुओं
के
वास्ते
सूरज
से
झगड़ा
मोल
ले
ये
हिमाक़त
भी
किसी
सूरज
के
बस
की
बात
है
Sandeep kushwaha
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ये
तेरा
रंग
नया
है
तू
सँभलियो
प्यारे
रंग
उतरे
तो
ये
दीवार
बुरी
लगती
है
Sandeep kushwaha
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