rakht-e-safar | "रख़्त-ए-सफ़र"

  - Salman Yusuf
"रख़्त-ए-सफ़र"
अगरयेरुकनामुहालहो
अगरयेअर्जेंटकॉलहो
जानेपरगरवबालहो
तोमेरीमानोठहरहीजाओ
दूरजाकरमुझेसताओ
येक्याकहाकिनहींरुकोगे
सफ़रज़रूरीहैचलपड़ोगे
किसीकीमिन्नतनहींसुनोगे
जोठानलीहैतोकरहीदोगे
तोमुझकोमेरायेदरमुबारक
तुम्हेंवोउजलाशहरमुबारक
मेरेपहलूसेजानेवाले
नएशहरकासफ़रमुबारक
जोअबसफ़रपरनिकलपड़ेहो
नईडगरपरजोचलपड़ेहो
तोअपनेदिलकाख़यालरखना
मेरीमुहब्बतसँभालरखना
  - Salman Yusuf
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