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Sakshi Saraswat
main mit jaaun jahaan se gar mujhe khoya hua kehna
main mit jaaun jahaan se gar mujhe khoya hua kehna | मैं मिट जाऊँ जहाँ से गर मुझे खोया हुआ कहना
- Sakshi Saraswat
मैं
मिट
जाऊँ
जहाँ
से
गर
मुझे
खोया
हुआ
कहना
कोई
आए
मुझे
मिलने
मुझे
सोया
हुआ
कहना
मेरी
नज़्में
सुनाना
तुम
मेरा
इक
गीत
गा
देना
मेरे
आँगन
की
तुलसी
में
मुझे
बोया
हुआ
कहना
मेरे
कमरे
से
सारे
ख़्वाब
चुन
बादल
पे
बुन
देना
वो
जब
बरसे
तो
तुम
उसको
मेरा
गोया
हुआ
कहना
- Sakshi Saraswat
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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मेरे
होंटों
पे
अपनी
प्यास
रख
दो
और
फिर
सोचो
कि
इस
के
बा'द
भी
दुनिया
में
कुछ
पाना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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थोड़ी
सिसकी
थोड़ी
ठिठकी
पागल
होना
अच्छा
है
जग
की
गाथा
गाने
वाले
तेरा
रोना
अच्छा
है
Sakshi Saraswat
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तेरा
मग़रूर
हो
जाना
मुझे
खलता
नहीं
लेकिन
तेरी
आँखों
से
मुझको
और
कुछ
मालूम
होता
है
Sakshi Saraswat
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ये
बेबाकी
कहो
या
कह
दो
इसको
भारी
लाचारी
सभी
हसरत
के
ऊपर
है
हमेशा
मेरी
ख़ुद्दारी
भले
ख़ंजर
मिले
हर
दर
पे
सारे
ग़म
मुबारक
हो
मुहब्बत
से
सलामत
हो
हमेशा
दिल
की
अलमारी
चले
आते
हैं
फिर
उस
राह
पर
हम
होने
को
रुस्वा
जो
मिटने
पर
भी
चलती
है
ये
है
संगीन
बीमारी
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Sakshi Saraswat
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मेरे
ज़ख़्मों
की
सरगम
को
हवाओं
ने
समेटा
है
कोई
छू
कर
गुज़रता
है
उसे
बरखा
समझता
है
मैं
तुमको
कह
तो
देती
ग़म
मेरा,
मेरी
ये
बेचैनी
मगर
तुम
में,
यहाँ
सब
में
मुझे
अब
फ़र्क
लगता
है
जो
तन्हा
है
वो
तन्हाई
के
क़िस्सों
को
नहीं
गाता
जो
महशर
में
दबा
जज़्बों
को
बैठा
है
वो
तन्हा
है
~साक्षी
सारस्वत
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Sakshi Saraswat
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हमारे
दर्मियां
कुछ
था
नहीं
जग
में
नुमाइश
थी
तेरे
जाने
पे
फिर
क्यूँँ
दिल
मेरा
नासूर
होता
है
Sakshi Saraswat
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