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Sakshi Saraswat
thodii sisaki thodii thithki paagal hona achha hai
thodii sisaki thodii thithki paagal hona achha hai | थोड़ी सिसकी थोड़ी ठिठकी पागल होना अच्छा है
- Sakshi Saraswat
थोड़ी
सिसकी
थोड़ी
ठिठकी
पागल
होना
अच्छा
है
जग
की
गाथा
गाने
वाले
तेरा
रोना
अच्छा
है
- Sakshi Saraswat
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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दिल-ए-सोज़ाँ
को
भी
महका
रहे
हैं
हमें
जो
ख़्वाब
तेरे
आ
रहे
हैं
तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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आप
के
मुँह
से
सुनना
अच्छा
लगता
था
पागल
हो
क्या
पागल
ऐसा
नइँ
कहते
Shadab Asghar
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न
तुम्हें
होश
रहे
और
न
मुझे
होश
रहे
इस
क़दर
टूट
के
चाहो
मुझे
पागल
कर
दो
Wasi Shah
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तुम्हारी
ख़ानदानी
रस्म
रस्म-ए-बेवफ़ाई
है
हमीं
पागल
थे
जो
तुम
पर
भरोसा
कर
लिया
हमने
Shajar Abbas
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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अपने
दिल
में
बसाओगे
हमको
और
गले
से
लगाओगे
हमको
हम
नहीं
इतने
प्यार
के
क़ाबिल
तुम
तो
पागल
बनाओगे
हमको
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Abrar Kashif
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तुमने
जब
से
अपनी
पलकों
पर
रक्खा
कालिख़
को
सब
काजल
काजल
कहते
हैं
इश्क़
में
पागल
ही
तो
होना
होता
है
पागल
हैं
जो
मुझको
पागल
कहते
हैं
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Vishal Bagh
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कोई
पागल
ही
मोहब्बत
से
नवाज़ेगा
मुझे
आप
तो
ख़ैर
समझदार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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ये
सोचते
रहना
मुझे
पागल
ही
न
कर
दे
ये
सोचते
रहना
कि
मैं
पागल
तो
नहीं
हूँ
Aamir Azher
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मैं
बेमतलब
सा
इश्क़
निभाना
चाहती
हूँ
उसकी
बातों
से
नज़्म
चुराना
चाहती
हूँ
Sakshi Saraswat
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तेरा
मग़रूर
हो
जाना
मुझे
खलता
नहीं
लेकिन
तेरी
आँखों
से
मुझको
और
कुछ
मालूम
होता
है
Sakshi Saraswat
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ये
हर
शब
की
कहानी
है
मुझे
सब
से
छुपानी
है
मैं
ख़ुद
तक
रख
भी
लूँ
लेकिन
मेरी
आँखों
में
पानी
है
अगर
वो
पूछ
लेता
तो
ज़रा
राहत
मिली
होती
वो
कह
कर
के
गया
है
फिर
वही
आदत
पुरानी
है
जो
शामों
में
बहकती
है
जो
सुब्हों
में
चहकती
है
जो
इक
पल
में
बिख़र
जाए
वही
तो
ज़िंदगानी
है
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Sakshi Saraswat
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मैं
जब
घर
थी
तो
राहत
थी
बड़ा
महफ़ूज़
कोना
था
मैं
अब
भी
हॅंस
के
चलती
हूॅं
जहाँ
जी
भर
के
रोना
था
जहाँ
भर
से
शिकायत
थी
मुझे
तेरा
भरोसा
था
अभी
लगने
लगा
है
तुझ
को
पाना
ख़ुद
को
खोना
था
सभी
राहों
पे
चलकर
अब
मुझे
महसूस
होता
है
जो
होना
है
वो
होता
है
जो
होता
है
वो
होना
था
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Sakshi Saraswat
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मेरे
दिल
पर
तेरी
इस
तरह
हुकूमत
हो
जैसे
कजरे
को
बस
आँखों
की
ज़रूरत
हो
इक
शाइर
से
जन्नत
जा
के
कहना
है
ये
देखो
मर
ही
जाऊँ
जो
तुम
सेे
फ़ुर्सत
हो
सबने
उसको
देखा
है
ग़ैर
की
बाहों
में
शायद
उस
चेहरे
में
भी
मेरी
सूरत
हो
अब
जब
मिलती
हूँ
ख़ुद
से
हँस
के
मिलती
हूँ
हो
सकता
है
अगले
पल
ख़ुद
से
फ़ुर्क़त
हो
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Sakshi Saraswat
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