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Sachin Sharma
she'r vo ham nahin sunaayenge
she'r vo ham nahin sunaayenge | शे'र वो हम नहीं सुनाएँगे
- Sachin Sharma
शे'र
वो
हम
नहीं
सुनाएँगे
ऐब
सारे
नज़र
आ
जाएँगे
खींच
लेते
हैं,
हाथ
मौक़े
पर
हाथ
उन
से
नहीं
मिलाएँगे
- Sachin Sharma
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हमारे
सीने
पे
उँगलियों
से
तुम
अपना
चेहरा
बना
रहे
थे
तुम्हें
कुछ
उस
की
ख़बर
नहीं
थी
हमारे
दिल
में
जो
चल
रहा
था
Nadim Nadeem
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मैं
खोया
खोया
सा
तेरी
छत
की
जानिब
देख
रहा
हूँ
गीले
कपड़े
सूख
रहे
हैं,
सूखी
आँखें
भीग
रही
हैं
Harman Dinesh
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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हुस्न
बख़्शा
जो
ख़ुदा
ने
आप
बख़्शें
दीद
अपनी
आरज़ू–ए–चश्म
पूरी
हो
मुकम्मल
ईद
अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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एक
ही
बार
नज़र
पड़ती
है
उन
पर
‘ताबिश’
और
फिर
वो
ही
लगातार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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देखने
के
लिए
सारा
आलम
भी
कम
चाहने
के
लिए
एक
चेहरा
बहुत
Asad Badayuni
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बादलों
की
उड़ान
छोटी
है
बूँद
नन्ही
सी
जान
छोटी
है
हद
से
ज़्यादा
कभी
नहीं
बोला
इक
मिरी
ये
ज़ुबान
छोटी
है
घर
को
आते
ही
सर
दबाने
पर
बोले
पापा
थकान
छोटी
है
तीर
इक
दम
नुकीला
है
मेरा
बस
मिरी
ये
कमान
छोटी
है
दूर
तक
हम
नज़र
न
रख
पाए
ये
'सचिन'
की
मचान
छोटी
है
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Sachin Sharma
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मोहब्बत
के
दर
पर
जो
आए
हुए
हैं
सलीके
से
दिल
में
बिठाए
हुए
हैं
सनम
देवता
बन
गया
इश्क़
का
अब
ये
सर
उसके
आगे
झुकाए
हुए
हैं
नसीब
आज़माओ
मुझे
तुम
हरा
दो
अभी
मैंने
पत्ते
छुपाए
हुए
हैं
हैं
हाज़िर
जवाबी
में
आगे
सभी
से
ये
बंदे
हमारे
सिखाए
हुए
हैं
मोहब्बत
हो
या
ग़म-ज़दा
ज़िंदगी
पर
नए
लड़को
पे
जौन
छाए
हुए
हैं
मज़ा
आता
था
शे'र
पढ़ने
में
उनको
तभी
जौन
सिगरेट
जलाए
हुए
हैं
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Sachin Sharma
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रह
गई
है
बस
दिखावे
वाली
चीज़ें
मैं
लगा
दूँ
आग
बेहतर
है
इन्हें
भी
Sachin Sharma
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जा
चुके
हैं
वो
रिहा
होकर
इधर
से
छिन
गया
जैसे
उजाला
हो
क़मर
से
Sachin Sharma
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बहुत
बेचैन
होता
हूँ
तो
इक
तस्वीर
देखूँ
मैं
लकीरों
पर
नहीं
विश्वास
क्या
तक़दीर
देखूँ
मैं
Sachin Sharma
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