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Sachin Sharma
rah gayi hai bas dikhaave waali cheezen
rah gayi hai bas dikhaave waali cheezen | रह गई है बस दिखावे वाली चीज़ें
- Sachin Sharma
रह
गई
है
बस
दिखावे
वाली
चीज़ें
मैं
लगा
दूँ
आग
बेहतर
है
इन्हें
भी
- Sachin Sharma
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एक
परिन्दे
का
घर
उजाड़
दिया
किसी
ने
बस
बच्चों
के
इक
दिन
के
झूले
की
ख़ातिर
Pankaj murenvi
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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तुम
भी
वैसे
थे
मगर
तुम
को
ख़ुदा
रहने
दिया
इस
तरह
तुम
को
ज़माने
से
जुदा
रहने
दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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हस्ती
का
नज़ारा
क्या
कहिए
मरता
है
कोई
जीता
है
कोई
जैसे
कि
दिवाली
हो
कि
दिया
जलता
जाए
बुझता
जाए
Nushur Wahidi
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जो
तेरी
बाँहों
में
हँसती
रही
है
खेली
है
वो
लड़की
राज़
नहीं
है
कोई
पहेली
है
हाँ
मेरा
हाथ
पकड़
कर
झटक
दिया
उसने
सहारा
दे
के
बताया
कि
तू
अकेली
है
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Tajdeed Qaiser
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क्या
बोला
मुझे
ख़ुद
को
तुम्हारा
नहीं
कहना
ये
बात
कभी
मुझ
सेे
दुबारा
नहीं
कहना
ये
हुक़्म
भी
उस
जान
से
प्यारे
ने
दिया
है
कुछ
भी
हो
मुझे
जान
से
प्यारा
नहीं
कहना
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Ali Zaryoun
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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इस
राह
से
अभी
तो
भटकने
लगे
हैं
हम
कितनों
कि
आँख
में
तो
खटकने
लगे
हैं
हम
ऐसे
सवार
होता
है
साया
कि
पूछो
मत
उस
छत
के
पंखे
से
भी
लटकने
लगे
है
हम
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Sachin Sharma
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रोज़
बदलता
है
स्टोरी
अपनी
वो
हर
तस्वीर
हिफ़ाज़त
से
रक्खी
है
Sachin Sharma
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कोई
शख़्स
आईने
के
जैसा
हो
जिसे
हर
दफ़ा
देखना
चाहूँ
मैं
Sachin Sharma
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पहले
ही
मिसरे
में
आप
याद
आ
गए
और
ग़ज़ल
ये
धरी
की
धरी
रह
गई
Sachin Sharma
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राह
चलते
हुए
माफ़िया
मिल
गया
खोली
लट
उस
ने
बस
क़ाफ़िया
मिल
गया
झील
आँखें,
नदी
है
कमर
प्यार
की
सारा
का
सारा
जुग़राफ़िया
मिल
गया
इतना
विश्वास
है
हम
को
तुझ
पर
सनम
उस
ख़ुदा
की
क़सम
साफ़िया
मिल
गया
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Sachin Sharma
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