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Sachin Sharma
KHushi se maut boli tum raho zinda
KHushi se maut boli tum raho zinda | ख़ुशी से मौत बोली तुम रहो ज़िंदा
- Sachin Sharma
ख़ुशी
से
मौत
बोली
तुम
रहो
ज़िंदा
मैं
इस
सद
में
से
मरना
चाहता
हूँ
अब
- Sachin Sharma
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दुखी
रहने
की
आदत
यूँंँ
बना
ली
है
कि
अब
कोई
ख़ुशी
का
ज़िक्र
भी
कर
दे
तो
फिर
तकलीफ़
होती
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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मिरी
सुब्ह
का
यूँँ
भी
इज़हार
हो
पियाला
हो
कॉफ़ी
का
अख़बार
हो
कोई
जुर्म
साबित
न
हो
उसका
फिर
जो
तेरी
हँसी
में
गिरफ़्तार
हो
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Swapnil Tiwari
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सब
का
ख़ुशी
से
फ़ासला
एक
क़दम
है
हर
घर
में
बस
एक
ही
कमरा
कम
है
Javed Akhtar
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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मुझको
गया
था
छोड़
के
वो
कितने
तैश
में
लेकिन
ख़ुशी
से
रह
न
सका
एक
साल
भी
Ankit Maurya
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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खू़ँ
भरा
ख़त
है
ग़लत
है
शा'इरी
लत
है
ग़लत
है
छोड़
लड़की
हाथ
मेरा
ओछी
हरकत
है
ग़लत
है
भाग
के
शादी
करे
जो
ये
मुहब्बत
है
ग़लत
है
दिल
से
दिल
मिलना
है
बेहतर
तन
की
चाहत
है
ग़लत
है
अंधो
में
काना
है
राजा
बादशाहत
है
ग़लत
है
न्याय
के
मंदिर
रखी
है
अंधी
मूरत
है
ग़लत
है
जौन
ने
थूका
लहू
था
तब
ये
शोहरत
है
ग़लत
है
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Sachin Sharma
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राम
मय
हो
गया
नगर
देखो
सज
रही
फूलों
से
डगर
देखो
राम
तो
सब
के
हो
ही
जाते
है
राम
के
हो
के
तुम
अगर
देखो
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Sachin Sharma
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बिछड़
कर
फिर
वहीं
मिलना
कभी
आसाँ
नहीं
होता
मुहब्बत
का
नया
रस्ता
कभी
आसाँ
नहीं
होता
तू
ग़ालिब
मीर
मोमिन
का
पुजारी
है
मगर
सुन
ले
ग़ज़ल
की
राह
पे
चलना
कभी
आसाँ
नहीं
होता
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Sachin Sharma
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नहीं
देखूँ
लड़की
नज़र
से
ग़लत
कलाई
में
राखी
बँधी
रहती
है
Sachin Sharma
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शे'र
वो
हम
नहीं
सुनाएँगे
ऐब
सारे
नज़र
आ
जाएँगे
खींच
लेते
हैं,
हाथ
मौक़े
पर
हाथ
उन
से
नहीं
मिलाएँगे
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Sachin Sharma
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