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Sachin Sharma
raam may ho gaya nagar dekho
raam may ho gaya nagar dekho | राम मय हो गया नगर देखो
- Sachin Sharma
राम
मय
हो
गया
नगर
देखो
सज
रही
फूलों
से
डगर
देखो
राम
तो
सब
के
हो
ही
जाते
है
राम
के
हो
के
तुम
अगर
देखो
- Sachin Sharma
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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जहाँ
पे
मैंने
तुझे
पहली
बार
देखा
था
वहाँ
पे
फूल
रखे
मैंने,
उम्र
भर
रक्खे
Aslam Rashid
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तुम्हारे
बाद
इस
आँगन
में
फूल
खिलने
पर
ख़ुशी
हुई
भी
तो
ये
दुख
हुआ
कि
दें
किसको
Mohit Dixit
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
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Tanoj Dadhich
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पत्ता
पत्ता
बूटा
बूटा
हाल
हमारा
जाने
है
जाने
न
जाने
गुल
ही
न
जाने
बाग़
तो
सारा
जाने
है
Meer Taqi Meer
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ये
शबनमी
लहजा
है
आहिस्ता
ग़ज़ल
पढ़ना
तितली
की
कहानी
है
फूलों
की
ज़बानी
है
Bashir Badr
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बचपने
की
मुहब्बत-मुहब्बत
सी
थी
बाद
इसके
हवस-कारी
हो
जाती
है
Sachin Sharma
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अलविदा
बोला
बड़े
ही
प्यार
से
मैं
लिपटकर
रोया
फिर
दीवार
से
आज
मैं
इज़हार
कर
दूँ
तो
उधर
कहने
लग
जाएगा
वो
दो
चार
से
प्रेम
ही
आधार
है
जीवन
का
तो
क्या
ही
हासिल
होगा
इस
तकरार
से
अपने
पैरों
पे
खड़ा
हो
जाऊँ
तो
तेरे
बारे
में
कहूँ
विस्तार
से
इतना
क्यूँ
इतराना
अपने
आप
पर
इक
न
इक
दिन
जाना
है
संसार
से
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Sachin Sharma
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दो
और
दो
ये
पाँच
कब
कैसे
हुआ
इक
और
इक
ग्यारह
के
ही
जैसे
हुआ
Sachin Sharma
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शे'र
कहने
के
न
चक्कर
में
पड़े
कुछ
नहीं
होगा
यूँँ
बिस्तर
में
पड़े
हो
के
ग़ुस्से
में
पिताजी
ने
कहा
तोड़ते
हो
रोटियाँ
घर
में
पड़े
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Sachin Sharma
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नहीं
देखूँ
लड़की
नज़र
से
ग़लत
कलाई
में
राखी
बँधी
रहती
है
Sachin Sharma
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