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Sachin Sharma
jee kya meraa har baar sahna sahi hai
jee kya meraa har baar sahna sahi hai | जी क्या मेरा हर बार सहना सही है
- Sachin Sharma
जी
क्या
मेरा
हर
बार
सहना
सही
है
यहाँ
चोर
को
चोर
कहना
सही
है
गुलामी
तो
मैं
करके
ऊपर
न
जाँऊ
हमारा
ज़मीं
पे
ही
रहना
सही
है
- Sachin Sharma
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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परवरदिगार
आपके
सब
फैसले
अजीब
हैं
जो
तंग
था
वो
तंग
है
जो
ठीक
था
वो
मर
गया
Adnan Raza
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ये
तुम
भी
जानते
हो
कि
हालात
नर्म
है
कहने
को
कह
रहा
हूँ
कि
सब
ठीक
ठाक
है
shaan manral
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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ख़ुशरंग
नज़र
आता
है
जाज़िब
नहीं
लगता
माहौल
मेरे
दिल
से
मुख़ातिब
नहीं
लगता
मैं
भी
नहीं
हर
शे'र
में
मौजूद
ये
सच
है
ग़ालिब
भी
हर
इक
शे'र
में
ग़ालिब
नहीं
लगता
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Obaid Azam Azmi
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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हमको
नफ़रत
है
मुहब्बत
से,
कि
हमने
महफ़िलो
में
देखा
है
रोता
हुआ
जॉन
Sachin Sharma
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उँगलियाँ
किरदार
पर
शर्मा
उठाए
नाम
मेरा
डूबा
इस
झूठी
ख़बर
से
Sachin Sharma
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बिछड़
कर
फिर
वहीं
मिलना
कभी
आसाँ
नहीं
होता
मुहब्बत
का
नया
रस्ता
कभी
आसाँ
नहीं
होता
तू
ग़ालिब
मीर
मोमिन
का
पुजारी
है
मगर
सुन
ले
ग़ज़ल
की
राह
पे
चलना
कभी
आसाँ
नहीं
होता
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Sachin Sharma
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देखते
ही
ख़ुमार
बढ़
जाए
इश्क़
का
फिर
बुख़ार
बढ़
जाए
रोज़
गोबर
लगा
के
बैठा
कर
चेहरे
का
फिर
निखार
बढ़
जाए
तुझ
सेे
मिलने
चला
मैं
आऊँगा
थोड़ी
सी
बस
पगार
बढ़
जाए
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Sachin Sharma
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किसी
की
नज़र
का
दिवाना
बनूँ
किसी
के
लबों
का
तराना
बनूँ
तू
बन
कर
मुसाफ़िर
अगर
आ
गया
तिरी
रात
का
मैं
ठिकाना
बनूँ
दराज़ों
को
जो
भेदने
हैं
लगे
चले
तीर
और
मैं
निशाना
बनूँ
दे
दूँ
देह
अपनी
सभी
पुर्ज़े
भी
कि
मरते
हुए
भी
ख़ज़ाना
बनूँ
हमेशा
से
आँखों
में
चुभता
रहा
कभी
दर्द
कोई
पुराना
बनूँ
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Sachin Sharma
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