hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Saahir
ham qai
ham qai | हम क़ैदी भी रिहा किए जाएँ इक दिन
- Saahir
हम
क़ैदी
भी
रिहा
किए
जाएँ
इक
दिन
हम
लोगों
को
भी
तो
खुलकर
जीना
है
- Saahir
Download Sher Image
करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
Read Full
Kashif Adeeb Makanpuri
Send
Download Image
39 Likes
क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
Read Full
Afzal Ali Afzal
Send
Download Image
30 Likes
ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
Send
Download Image
69 Likes
ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
Send
Download Image
17 Likes
मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
Read Full
Umair Najmi
Send
Download Image
85 Likes
फ़रेब
दे
गया
इस
सादगी
से
वो
मुझको
कि
जुर्म
सारा
ही
मजबूरियों
के
सर
आया
Harsh saxena
Send
Download Image
46 Likes
आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
Read Full
Nisar Nasik
Send
Download Image
33 Likes
मिलेगी
क़ैद
से
कैसे
रिहाई
कौन
सोचेगा
यहाँ
तेरे
सिवा
तेरी
भलाई
कौन
सोचेगा
ज़माने
भर
का
तू
सोचेगा
तो
फिर
तेरे
बारे
में
मुझे
तू
ही
बता
दे
मेरे
भाई,
कौन
सोचेगा?
Read Full
Siddharth Saaz
Send
Download Image
12 Likes
इक
फ़ुर्सत-ए-गुनाह
मिली
वो
भी
चार
दिन
देखे
हैं
हम
ने
हौसले
परवरदिगार
के
Faiz Ahmad Faiz
Send
Download Image
29 Likes
ये
जब्र
भी
देखा
है
तारीख़
की
नज़रों
ने
लम्हों
ने
ख़ता
की
थी
सदियों
ने
सज़ा
पाई
Muzaffar Razmi
Send
Download Image
21 Likes
Read More
सिगरिटें
क्या
हैं
तुम
जानती
हो?
बद'दु'आ
है
सभी
शायरों
पे
Saahir
Send
Download Image
14 Likes
मुझको
रोना
है
जी
भर
के
कोई
हाल
पूछ
ले
मेरा
जिसको
मैं
अच्छा
लगता
हूँ
वो
पहले
घर
देखे
मेरा
Read Full
Saahir
Send
Download Image
4 Likes
इश्क़
में
नाकाम
हो
कर
शा'इरी
करती
रही
और
ग़म
उदासी
की
दुकाँ
बनती
गईं
नस्लें
हमारी
Saahir
Send
Download Image
4 Likes
हम
तुम्हारी
जालसाज़ी
पर
नहीं
रोए
हमको
रोना
था
सहेली
पर
नहीं
रोए
हमने
कंधा
चाहा
था
उसने
हथेली
दी
एक
ज़िद
थी
हम
हथेली
पर
नहीं
रोए
Read Full
Saahir
Send
Download Image
5 Likes
दोस्त
से
जब
माँगे
पैसे
मैंने
तब
वो
दे
रहा
था
झाँसा
मुझको
मुफ़लिसी
का
Saahir
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Raushni Shayari
Propose Shayari
Mood off Shayari
Garmi Shayari
Jalwa Shayari