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Saahir
ishq men naakaam ho kar shayari karti rahi aur
ishq men naakaam ho kar shayari karti rahi aur | इश्क़ में नाकाम हो कर शा'इरी करती रही और
- Saahir
इश्क़
में
नाकाम
हो
कर
शा'इरी
करती
रही
और
ग़म
उदासी
की
दुकाँ
बनती
गईं
नस्लें
हमारी
- Saahir
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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दो
घड़ी
को
पास
आया
था
कोई
दिल
पे
बरसों
हुक्मरानी
कर
गया
Subhan Asad
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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मुझको
कितना
घोर
दुख
है
मेरे
चारों
ओर
दुख
है
चैन
चोरी
हो
गया
है
और
इसका
चोर
दुख
है
मैंने
चुप
रहना
कहा
था
क्यूँ
मचाया
शोर
दुख
है
जिनको
शब
अच्छी
लगे
है
उन
सभी
को
भोर
दुख
है
ज़िंदगी
की
डोरी
का
इक
छोर
सुख
इक
छोर
दुख
है
सुख
के
सारे
मोतियों
को
बाँधे
है
जो
डोर
दुख
है
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Saahir
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मैं
लिखकर
हिज़रत
काटूँगा
हैरत
क्यूँँ
सबका
अपना
अपना
तौर
तरीक़ा
है
Saahir
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हार
के
तौर
तरीकों
पे
ग़ौर
कीजिए
आप
खेल
के
बाद
नतीजों
पे
ग़ौर
कीजिए
आप
Saahir
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देख
कर
लगता
है
क्या
नस
काटी
थी
मैंने
हाँ
मगर
ये
भी
किया
था
वाक़ई
मैंने
एक
दिन
वो
ख़ूब
रोई
मेरे
रोने
पतब
से
बस
हँस
के
गुज़ारी
ज़िंदगी
मैंने
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Saahir
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काश
ज़िंदगी
भी
कुछ
फिल्मी
होती
अंत
में
सब
अच्छा
होता
परदे
पर
Saahir
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