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Saahir
mujhko kitna ghor dukh hai
mujhko kitna ghor dukh hai | मुझको कितना घोर दुख है
- Saahir
मुझको
कितना
घोर
दुख
है
मेरे
चारों
ओर
दुख
है
चैन
चोरी
हो
गया
है
और
इसका
चोर
दुख
है
मैंने
चुप
रहना
कहा
था
क्यूँ
मचाया
शोर
दुख
है
जिनको
शब
अच्छी
लगे
है
उन
सभी
को
भोर
दुख
है
ज़िंदगी
की
डोरी
का
इक
छोर
सुख
इक
छोर
दुख
है
सुख
के
सारे
मोतियों
को
बाँधे
है
जो
डोर
दुख
है
- Saahir
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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तुझे
ख़याल
नहीं
है
सो
हम
बढ़ा
रहे
हैं
फिर
इक
दफ़ा
तेरी
ज़ानिब
क़दम
बढ़ा
रहे
हैं
बहुत
से
आए
तुझे
जीतने
की
ख़्वाहिश
में
हम
एक
कोने
में
बैठे
रक़म
बढ़ा
रहे
हैं
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Zahid Bashir
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बुरा
मनाया
था
हर
आहट
हर
सरगोशी
का
सोचो
कितना
ध्यान
रखा
उसने
ख़ामोशी
का
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हम
को
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
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Khurram Afaq
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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मैं
उस
सेे
दूर
था
तो
शोर
था
साजिश
है,
साजिश
है
उसे
बाहों
में
खुलकर
कस
लिया
दो
पल
तो
हंगामा
Kumar Vishwas
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बाहरस
उतना
ही
शोर
मचाता
है
जो
अंदर
से
जितना
ख़ाली
होता
है
Sadia Sawera
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मेरा
दस्तक
देना
इतना
अच्छा
लगता
है
उसको
दस्तक
देना
बंद
करूँँ
तो
दरवाज़ा
खुल
जाता
है
Vishnu virat
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मैं
लिखकर
हिज़रत
काटूँगा
हैरत
क्यूँँ
सबका
अपना
अपना
तौर
तरीक़ा
है
Saahir
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कोई
है
ही
नहीं
मेरे
जैसा
बात
गर
बे-वफ़ाई
पे
आए
Saahir
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वो
माँ
तो
मर
ही
जाएगी
सद
में
से
वो
जिसका
बेटा
लटका
हो
पंखे
से
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Saahir
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रोते-रोते
सोए
थे
नहीं
पता
फिर
किसका
सर
था
किसके
कंधे
पर
Saahir
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ये
समझ
में
आ
गया
बेरोज़गारी
के
दिनों
में
पैसा
है
अपनी
जगह
और
दोस्ती
अपनी
जगह
पर
Saahir
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