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Ravi 'VEER'
ye karunga vo karunga sochta hooñ khwaab men par
ye karunga vo karunga sochta hooñ khwaab men par | ये करूँँगा, वो करूँँगा, सोचता हूँ ख़्वाब में पर
- Ravi 'VEER'
ये
करूँँगा,
वो
करूँँगा,
सोचता
हूँ
ख़्वाब
में
पर
लग
रहा
है
यार
मैं
बस
ख़्वाब
ही
देखा
करूँँगा
- Ravi 'VEER'
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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हालत
जो
हमारी
है
तुम्हारी
तो
नहीं
है
ऐसा
है
तो
फिर
ये
कोई
यारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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दुनिया
की
नज़रों
में
हम
तो
जोकर
हैं
सबको
ख़ुश
रक्खें
मतलब
वो
जोकर
हैं
ख़त्म
कहानी
कर
के
जब
तुम
ही
ख़ुश
हो
अपना
क्या
है
यार
अपन
तो
जोकर
हैं
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Nadim Nadeem
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और
फिर
लोग
यही
कहते
फिरेंगे
इक
दिन
यार
कल
ही
तो
मेरी
बात
हुई
थी
उस
सेे
Saad Ahmad
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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नींद
से
आज
फिर
मुहब्बत
जीत
जाएगी
लगता
है,
ये
रात
भी,
ऐसे
ही
बीत
जाएगी
मुफ़लिसी
का
आलम
है
क्या
करे
जनाब
भूख
से
लड़ते
लड़ते
तो
ज़िन्दगी
बीत
जाएगी
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Ravi 'VEER'
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पहले
दिल
को
आह
मिली
फिर
ग़ज़लों
को
वाह
मिली
जिसकी
ख़ातिर
मैं
तरसा
गैरों
को
वो
बाह
मिली
मैंने
था
चाहा
जिसको
उसको
सबकी
चाह
मिली
हाल
मेरा
जिसने
पूछा
उनको
इक
अफ़वाह
मिली
अरसों
तक
ख़ुद
को
बेचा
तब
जाकर
तनख़्वाह
मिली
बरसों
तक
भटका
पहले
फिर
जाकर
इक
राह
मिली
'वीर'
तुझे
है
हैरत
क्यूँँ
?
किसको
आख़िर
चाह
मिली
?
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Ravi 'VEER'
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खा
गई
ये
वक़्त
सारा
दो
पहर
की
नौकरी
मन
नहीं
होता
मगर
ये
नौकरी
करनी
भी
है
Ravi 'VEER'
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शा'इरी
क्या
ख़ाक
होगी
यार
उसके
हुस्न
पर
बस
कहूँगा
वो
ज़मीं
का
चाँद
लगता
है
मुझे
Ravi 'VEER'
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आख़िर
कैसे
ये
लोग
है
कैसी
ये
मक्कारी
करते
है
माँ
पर
लिखने
वाले
ही
अब
माँ
से
गद्दारी
करते
है
Ravi 'VEER'
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