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Ravi 'VEER'
neend se aaj phir muhabbat jeet jaayegi
neend se aaj phir muhabbat jeet jaayegi | नींद से आज फिर मुहब्बत जीत जाएगी
- Ravi 'VEER'
नींद
से
आज
फिर
मुहब्बत
जीत
जाएगी
लगता
है,
ये
रात
भी,
ऐसे
ही
बीत
जाएगी
मुफ़लिसी
का
आलम
है
क्या
करे
जनाब
भूख
से
लड़ते
लड़ते
तो
ज़िन्दगी
बीत
जाएगी
- Ravi 'VEER'
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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ये
सर्द
रात
ये
आवारगी
ये
नींद
का
बोझ
हम
अपने
शहर
में
होते
तो
घर
चले
जाते
Ummeed Fazli
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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लोग
कहते
है
कि
ज़हर
होता
है
इश्क़
फिर
भी
हमें
हर
पहर
होता
है
इश्क़
हमें
इश्क़
ख़ुदा
की
इबादत
लगती
है
कभी
कभी
लगा,
ख़ुदा
का
कहर
होता
है
इश्क़
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Ravi 'VEER'
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हमें
मालूम
कुछ
हाँसिल
नहीं
होगा
मगर
फिर
भी
तेरी
गलियों
में
घू
में
हम
शहर
में
थी
कईं
गलियां
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Ravi 'VEER'
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आसमाँ
को
देखिए
तारों
से
बातें
कीजिए
छोड़कर
उस
एक
को
सारों
से
बातें
कीजिए
मुश्किलें
हों
या
अकेलापन
सताए
गर
कभी
जाइए
जाकर
के
कुछ
यारों
से
बातें
कीजिए
बेबसी
ग़म
और
तन्हाई
में
रोना
कब
तलक
हो
नहीं
कोई
तो
दीवारों
से
बातें
कीजिए
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Ravi 'VEER'
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आख़िर
कैसे
ये
लोग
है
कैसी
ये
मक्कारी
करते
है
माँ
पर
लिखने
वाले
ही
अब
माँ
से
गद्दारी
करते
है
Ravi 'VEER'
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खा
गई
ये
वक़्त
सारा
दो
पहर
की
नौकरी
मन
नहीं
होता
मगर
ये
नौकरी
करनी
भी
है
Ravi 'VEER'
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