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Ravi 'VEER'
jab kabhi aa.e museebat main banuunga dhaal teri
jab kabhi aa.e museebat main banuunga dhaal teri | जब कभी आए मुसीबत मैं बनूँगा ढाल तेरी
- Ravi 'VEER'
जब
कभी
आए
मुसीबत
मैं
बनूँगा
ढाल
तेरी
यार
मैं
तेरे
लिए
तो
जान
का
सौदा
करूँँगा
- Ravi 'VEER'
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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कौन
रोता
है
किसी
और
की
ख़ातिर
ऐ
दोस्त
सब
को
अपनी
ही
किसी
बात
पे
रोना
आया
Sahir Ludhianvi
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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अब
दोस्त
कोई
लाओ
मुक़ाबिल
में
हमारे
दुश्मन
तो
कोई
क़द
के
बराबर
नहीं
निकला
Munawwar Rana
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कब
लौटा
है
बहता
पानी
बिछड़ा
साजन
रूठा
दोस्त
हम
ने
उस
को
अपना
जाना
जब
तक
हाथ
में
दामाँ
था
Ibn E Insha
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मुझको
ये
मालूम
नहीं
था
तुम
सेे
मिलने
से
पहले
दोस्त
जल्दी
आँखें
भरने
वालों
के
मन
जल्दी
भर
जाते
हैं
Vikas Rana
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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दुनिया
की
नज़रों
में
हम
तो
जोकर
हैं
सबको
ख़ुश
रक्खें
मतलब
वो
जोकर
हैं
ख़त्म
कहानी
कर
के
जब
तुम
ही
ख़ुश
हो
अपना
क्या
है
यार
अपन
तो
जोकर
हैं
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Nadim Nadeem
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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तुम्हें
भी
देखना
था
दर्द
मेरा
तुम्हें
नज़रें
मिलानी
चाहिए
थी
मिला
कुछ
भी
नहीं
इज़्ज़त
से
हमको
हमें
दौलत
कमानी
चाहिए
थी
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Ravi 'VEER'
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जब
भी
उठी
हैं
नज़रें
मैंने
तुझे
ही
देखा
जब
भी
झुकी
हैं
नज़रे
आगे
तेरे
झुकी
है
Ravi 'VEER'
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ज़रूरत
क्या
भला
उस
आइने
में
झाँकने
की
है
मुझे
लगता
है
जैसे
हुस्न
आकर
रुक
गया
तुम
पर
Ravi 'VEER'
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ज़ख़्म
सीने
पर
दिए
जो
याद
हमको
आज
भी
बुज़दिलों
के
कारना
में
भूल
कैसे
जाए
हम
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Ravi 'VEER'
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दर्द
सीने
में
मेरे
हरदम
रहा
हाँ
मगर
लहजे
में
थोड़ा
कम
रहा
ज़िन्दगी
गुज़री
बिना
महबूब
के
ज़िन्दगी
भर
इश्क़
का
मातम
रहा
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Ravi 'VEER'
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