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Ravi 'VEER'
jab bhi uthi hain nazren maine tujhe hi dekha
jab bhi uthi hain nazren maine tujhe hi dekha | जब भी उठी हैं नज़रें मैंने तुझे ही देखा
- Ravi 'VEER'
जब
भी
उठी
हैं
नज़रें
मैंने
तुझे
ही
देखा
जब
भी
झुकी
हैं
नज़रे
आगे
तेरे
झुकी
है
- Ravi 'VEER'
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कभी
ज़िन्दगी
से
यूँँ
न
चुराया
करो
नज़र
कि
मौजूद
भी
रहो
तो
न
आया
करो
नज़र
S M Afzal Imam
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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इक
तो
ये
नूर
उस
पे
मेरी
शर्म
भी
अलग
तू
सामने
रहा
तो
निगह
उठ
न
पाएगी
shaan manral
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बात
इतनी
सी
है
मेरे
हम
दम
तू
नज़र
आया
जब
जिधर
देखा
D Faiz Khan
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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दिल्ली
के
न
थे
कूचे
औराक़-ए-मुसव्वर
थे
जो
शक्ल
नज़र
आई
तस्वीर
नज़र
आई
Meer Taqi Meer
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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लाई
न
ऐसों-वैसों
को
ख़ातिर
में
आज
तक
ऊँची
है
किस
क़दर
तिरी
नीची
निगाह
भी
Firaq Gorakhpuri
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महीनों
बाद
आया
है
महीना
प्यार
का
लेकिन
महीनों
से
मेरा
महबूब
दर
मेरे
नहीं
आया
Ravi 'VEER'
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कोई
सुनता
है
कहाँ
टूटे
दिलो
की
दास्ताँ
इसलिए
करता
हूँ
बातें
आईने
से
आजकल
Ravi 'VEER'
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शा'इरी
ये
हुस्न
और
ये
इश्क़
की
बातें
जनाब
इक
समय
तक
ठीक
है
फिर
छोड़
देनी
चाहिए
Ravi 'VEER'
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अगर
खुशियाँ
मुकद्दर
में
रही
तो
ग़म
भी
आएँगे
अगर
आएँगे
हिस्से
ज़ख़्म
तो
मरहम
भी
आएँगे
Ravi 'VEER'
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जुर्म
में
शामिल
रहेंगे
खिड़कियाँ,
दीवार,
छत
और
फिर
औरत
की
अस्मत
कुंडियाँ
ले
जाएंगी
Ravi 'VEER'
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