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Kaviraj " Madhukar"
ghazlein likhte jiski khaatir
ghazlein likhte jiski khaatir | ग़ज़लें लिखते जिसकी ख़ातिर
- Kaviraj " Madhukar"
ग़ज़लें
लिखते
जिसकी
ख़ातिर
वो
भी
हमको
समझे
आख़िर
- Kaviraj " Madhukar"
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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ये
रख
रखाव
कभी
ख़त्म
होने
वाला
नहीं
बिछड़ते
वक़्त
भी
तुझको
गुलाब
दूँगा
मैं
Khurram Afaq
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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अब
मिरा
ध्यान
कहीं
और
चला
जाता
है
अब
कोई
फ़िल्म
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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तमाम
नाख़ुदा
साहिल
से
दूर
हो
जाएँ
समुंदरों
से
अकेले
में
बात
करनी
है
Tehzeeb Hafi
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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यही
अंजाम
अक्सर
हम
ने
देखा
है
मोहब्बत
का
कहीं
राधा
तरसती
है
कहीं
कान्हा
तरसता
है
Virendra Khare Akela
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किसी
की
अब
नहीं
चाहत
मुझे
बुरी
लगने
लगी
उल्फ़त
मुझे
कभी
होगी
तिरी
आदत
मुझे
अभी
सिगरेट
की
है
लत
मुझे
नहीं,
सिगरेट
की
इतनी
नहीं
हुयी
जितनी
तिरी
आदत
मुझे
कि
मैं
दौलत
नहीं
हूँ
चाहता
मगर
है
चाहिए
इज़्ज़त
मुझे
तुझे
ही
देखकर
मैं
जी
रहा
तुझी
से
मिल
रही
हिम्मत
मुझे
मुझे
सब
कुछ
समझ
लो
मिल
गया
मिले
उसकी
अगर
चाहत
मुझे
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Kaviraj " Madhukar"
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जो
मेरे
दिल
को
भाती
हो
वो
लड़की
तेरे
जैसी
हो
तुम
वैसे
कपड़ो
से
ज़्यादा
साड़ी
में
अच्छी
लगती
हो
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Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हें
ही
खास
कहना
था
मुझे
तुम्हारे
पास
रहना
था
मुझे
तुम्हीं
से
तो
मिला
था
इसलिए
मिला
हर
ज़ख़्म
सहना
था
मुझे
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Kaviraj " Madhukar"
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मुहब्बत
के
नियम
कानून
को
हम
तोड़ते
कैसे
कि
जिस
सेे
प्यार
था
हमको
उसे
हम
छोड़ते
कैसे
Kaviraj " Madhukar"
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दिली
'आशिक़
लगे
तो
इश्क़
करना
अगर
वो
भी
करे
तो
इश्क़
करना
Kaviraj " Madhukar"
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