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Kaviraj " Madhukar"
kisi ki ab nahin chaahat mujhe
kisi ki ab nahin chaahat mujhe | किसी की अब नहीं चाहत मुझे
- Kaviraj " Madhukar"
किसी
की
अब
नहीं
चाहत
मुझे
बुरी
लगने
लगी
उल्फ़त
मुझे
कभी
होगी
तिरी
आदत
मुझे
अभी
सिगरेट
की
है
लत
मुझे
नहीं,
सिगरेट
की
इतनी
नहीं
हुयी
जितनी
तिरी
आदत
मुझे
कि
मैं
दौलत
नहीं
हूँ
चाहता
मगर
है
चाहिए
इज़्ज़त
मुझे
तुझे
ही
देखकर
मैं
जी
रहा
तुझी
से
मिल
रही
हिम्मत
मुझे
मुझे
सब
कुछ
समझ
लो
मिल
गया
मिले
उसकी
अगर
चाहत
मुझे
- Kaviraj " Madhukar"
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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पहले
तो
मेरी
याद
से
आई
हया
उन्हें
फिर
आइने
में
चूम
लिया
अपने-आप
को
Shakeb Jalali
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मोहब्बत
एक
पाकीज़ा
अमल
है
इस
लिए
शायद
सिमट
कर
शर्म
सारी
एक
बोसे
में
चली
आई
Munawwar Rana
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सोचकर
अब
शर्म
आती
है
ज़रा
चूम
लेना
होंठ
को
इज़हार
में
Neeraj Neer
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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धौल-धप्पा
उस
सरापा
नाज़
का
शेवा
नहीं
हम
ही
कर
बैठे
थे
‘ग़ालिब’
पेश-दस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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हमारा
पेट
भर
भी
जाए
तब
भी
माँ
हमारी
हमें
दो
चार
रोटी
तो
ज़ियादा
ही
खिलाती
Kaviraj " Madhukar"
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उसको
तुमने
कम
समझा
है
वो
बस
कहने
को
अच्छा
है
बस
तुमको
ही
हम
दिखते
है
दुनिया
को
पैसा
दिखता
है
जिसकी
तुम
चाहत
करती
हो
वो
लड़का
जाने
कैसा
है
जबसे
तुम
नज़रों
से
ओझल
तबसे
मुझको
कम
दिखता
है
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Kaviraj " Madhukar"
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तुम
तक
जाने
की
कोशिश
की
तो
है
हमने
तुमको
पाने
की
कोशिश
की
तो
है
हमने
Kaviraj " Madhukar"
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किलों
को
जीतने
का
दम
भले
तलवार
में
है
दिलों
को
जीतने
का
दम
मगर
बस
प्यार
में
है
Kaviraj " Madhukar"
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हम
इतने
सस्ते
होते
तो
पैसों
में
आने
लगते
बेहद
कम
जिनकी
इज़्ज़त
उन
जैसों
में
आने
लगते
हम
ऐसे
वैसे
लोगों
से
तो
मिलते
जुलते
कम
हैं
वरना
अब
तक
हम
भी
ऐसे
वैसों
में
आने
लगते
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Kaviraj " Madhukar"
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