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Kaviraj " Madhukar"
bahut se zakham hamne bhi sahe hain
bahut se zakham hamne bhi sahe hain | बहुत से ज़ख़्म हमने भी सहे हैं
- Kaviraj " Madhukar"
बहुत
से
ज़ख़्म
हमने
भी
सहे
हैं
बहुत
से
शे'र
हैं
जो
अनकहे
हैं
बहुत
से
लोग
हैं
जो
फरवरी
में
ख़ुदी
के
साथ
बस
ज़िंदा
रहे
हैं
- Kaviraj " Madhukar"
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
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बे-ख़ुदी
में
ले
लिया
बोसा
ख़ता
कीजे
मुआ'फ़
ये
दिल-ए-बेताब
की
सारी
ख़ता
थी
मैं
न
था
Bahadur Shah Zafar
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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बे-ख़ुदी
बे-सबब
नहीं
'ग़ालिब'
कुछ
तो
है
जिस
की
पर्दा-दारी
है
Mirza Ghalib
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क्यूँँ
खुल
गए
लोगों
पे
मिरी
ज़ात
के
असरार
ऐ
काश
कि
होती
मिरी
गहराई
ज़रा
और
Aanis Moin
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न
कोई
सरोकार
तुम
सेे
मुझे
अब
नहीं
प्यार
तुम
सेे
ख़ुशी
भी
हमें
तब
मिली
है
हमें
जब
मिले
यार
तुम
सेे
मुझे
जीत
जैसी
लगेगी
मिले
जो
अगर
हार
तुम
सेे
किया
ही
नहीं
ग़ौर
तुमने
मिले
हम
बहुत
बार
तुम
सेे
हमें
प्यार
करना
कहीं
था
मगर
हो
गया
यार
तुम
सेे
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Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हारी
फरवरी
तुमको
मुबारक
हमारी
फरवरी
हम
काट
लेगें
Kaviraj " Madhukar"
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कि
हमने
सब
दिवाली
के
दिए
तिरे
ही
नाम
से
रौशन
किए
मिरी
ग़ज़लें
मिरी
हर
नज़्म
वो
मिरा
हर
शे'र
है
उसके
लिए
हमें
कोई
नहीं
है
चाहता
ख़ुदाया
हम
बने
किस
के
लिए
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Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हारी
आँख
पे
काजल
जमें
है
यूँँ
कि
जैसे
आसमाँ
पे
जम
रहे
बादल
Kaviraj " Madhukar"
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हक़ीक़त
तो
हमारी
थी
बहुत
कुछ
हमारी
दास्ताँ
कुछ
भी
नहीं
है
Kaviraj " Madhukar"
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