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Kaviraj " Madhukar"
haqeeqat to hamaari thii bahut kuchh
haqeeqat to hamaari thii bahut kuchh | हक़ीक़त तो हमारी थी बहुत कुछ
- Kaviraj " Madhukar"
हक़ीक़त
तो
हमारी
थी
बहुत
कुछ
हमारी
दास्ताँ
कुछ
भी
नहीं
है
- Kaviraj " Madhukar"
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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सदाक़त
हो
तो
दिल
सीनों
से
खिंचने
लगते
हैं
वाइज़
हक़ीक़त
ख़ुद
को
मनवा
लेती
है
मानी
नहीं
जाती
Jigar Moradabadi
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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उसी
में
क्यूँ
हुए
हो
गुम
बताओ
हमारे
क्यूँ
नहीं
हो
तुम
बताओ
Kaviraj " Madhukar"
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मिरे
घर
के
बड़े
नज़दीक
रहती
वो
मगर
दिल
से
बहुत
ही
दूर
है
यारो
Kaviraj " Madhukar"
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मुझको
तू
समझा
है
प्यारे
तू
कितना
अच्छा
है
प्यारे
जिस
में
बस
तुमको
रक्खे
हैं
ये
दिल
वो
बस्ता
है
प्यारे
तू
भी
मस्ती
में
रहता
है
तो
तू
भी
मुझ
सेा
है
प्यारे
अच्छी
कहते
हो
तुम
जिसको
वो
बद्तर
दुनिया
है
प्यारे
जो
अच्छा
दिखता
है
बेहद
वो
ही
तो
बिकता
है
प्यारे
जाने
किस
पर
ये
आ
जाए
मेरे
दिल
का
क्या
है
प्यारे
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Kaviraj " Madhukar"
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हम
भूले
हैं
दुनिया
अब
तो
बस
रहते
हैं
तन्हा
अब
तो
Kaviraj " Madhukar"
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किसी
को
दिन
किसी
को
रात
का
ग़म
है
यहाँ
सबको
किसी
इक
बात
का
ग़म
है
तुम्हारे
साथ
रहकर
भी
अकेला
हूँ
मुझे
यारा
इसी
इक
बात
का
ग़म
है
तुम्हारे
पास
तो
है
बस
तुम्हारा
ग़म
हमारे
पास
मख़्लूका़त
का
ग़म
है
कहे
कुछ
भी
मगर
सच
तो
यही
है
बस
उसे
मेरे
बुरे
हालात
का
ग़म
है
दिलासा
तो
बहुत
तुम
दे
रहे
मुझको
पता
भी
है
मुझे
किस
बात
का
ग़म
है
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