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Prit
yahaañ sab mere dost hain yaanii
yahaañ sab mere dost hain yaanii | यहाँ सब मेरे दोस्त हैं यानी
- Prit
यहाँ
सब
मेरे
दोस्त
हैं
यानी
यहाँ
कोई
भी
मेरा
दोस्त
नहीं
- Prit
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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चारा-गर
तो
तभी
बचा
पाएँगे
ना
चारा-गर
की
जान
बचाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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जब
मैं
काँटों
से
उलझा
तो
जाना
फूलों
से
इश्क़
करना
मुश्किल
है
Prit
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कोई
हैरत
न
होगी
बे-वफ़ा
निकली
वो
साधारण
सी
लड़की
बे-वफ़ा
निकली
वो
तेरी
भी
थी
वो
मेरी
भी
थी
तो
अब
कहें
क्या
किसकी
वाली
बे-वफ़ा
निकली
मुझे
बाकी
सभी
का
तो
पता
था
प्रीत
मगर
तू
यार
तू
भी
बे-वफ़ा
निकली
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Prit
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कोई
इतना
सुलझा
कैसे
हो
सकता
है
और
सुलझ
के
उलझा
कैसे
हो
सकता
है
Prit
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ओ
सितमगर
ज़रा
कम
सितम
कर
खा
तरस
मुझ
पे,
थोड़ा
रहम
कर
Prit
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उसे
चाहने
भर
से
मेरा
हो
जाए
परिंदा
है
कब
किस
शज़र
का
हो
जाए
Prit
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