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Prit
yaad unki qaraar hai dil ka
yaad unki qaraar hai dil ka | याद उनकी क़रार है दिल का
- Prit
याद
उनकी
क़रार
है
दिल
का
दर्द
ए
दिल
भी
तो
याद
है
उनकी
याद
ही
ज़ख़्म,
याद
ही
मरहम
क्या
ख़तरनाक
है
सज़ा
अपनी
- Prit
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आख़िरी
बार
मैं
कब
उस
से
मिला
याद
नहीं
बस
यही
याद
है
इक
शाम
बहुत
भारी
थी
Hammad Niyazi
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अब
उस
के
दर
से
भी
आवाज़
आती
है
कि
नहीं
बता
रे
ज़िन्दगी
तू
बाज़
आती
है
कि
नहीं
बहकने
लगता
है
जब
जब
किसी
के
प्यार
में
दिल
तो
तेरी
याद
यूँंँ
आके
डराती
है
कि
नहीं
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Faiz Ahmad
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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वो
किसी
को
याद
कर
के
मुस्कुराया
था
उधर
और
मैं
नादान
ये
समझा
कि
वो
मेरा
हुआ
Iqbal Ashhar
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जानता
हूँ
मैं
कि
तुम
वा'दा
फ़रामोश
नहीं
बस
तुम्हें
याद
दिलाने
में
मज़ा
आता
है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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मरने
का
है
ख़याल
ना
जीने
की
आरज़ू
बस
है
मुझे
तो
वस्ल
के
मौसम
की
जुस्तजू
Muzammil Raza
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नहीं
आती
तो
याद
उनकी
महीनों
तक
नहीं
आती
मगर
जब
याद
आते
हैं
तो
अक्सर
याद
आते
हैं
Hasrat Mohani
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तेरा
बनता
था
कि
तू
दुश्मन
हो
अपने
हाथों
से
खिलाया
था
तुझे
तेरी
गाली
से
मुझे
याद
आया
कितने
तानों
से
बचाया
था
तुझे
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Ali Zaryoun
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मेरे
अपने
हर
इक
पल
मेरा
दिल
नाशाद
करते
थे
मुझे
बर्बाद
कर
के
कहते
थे
आबाद
करते
थे
सो
मेरे
मसअलों
ने
ज़िंदगी
को
मौत
कर
डाला
जो
मुझको
जानते
थे
लाश
कह
कर
याद
करते
थे
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Prit
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मैं
सहरा
था
वो
बारिश
थी
वो
बरसे
ऐसी
ख़्वाहिश
थी
वो
बरसी
फिर
सैलाब
आया
और
अब
बचने
की
गुंजाइश
थी
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Prit
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ख़ुदा
जाने
ख़ुदा
कैसा
ख़ुदा
को
किसने
देखा
है
कहो,
तुम
भी
ख़ुदा
माँ–बाप
को
ही
मानते
हो
ना
Prit
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जब
तू
मुझे
मिलने
आया
ही
नहीं
तो
फिर
ये
तेरे
गले
के
नीचे
होंटों
के
निशाँ
कैसे?
Prit
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आज
कल
मुझ
सेे
तुम
रूठती
भी
नहीं
बात
क्या
है
जाँ,
किस
बात
पे
रूठी
हो
Prit
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