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Prit
tumhaari duaon ke saa.e men rahna
tumhaari duaon ke saa.e men rahna | तुम्हारी दु'आओं के साए में रहना
- Prit
तुम्हारी
दु'आओं
के
साए
में
रहना
मुझे
अच्छा
लगता
है
धोखे
में
रहना
नहीं
रहते
दिल
में
तेरे
इसलिए
भी
मकाँ
होते
क्यूँँकर
किराए
में
रहना
- Prit
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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तुम
नज़्म
सी
आज़ाद
रहना
चाहती
हो
मेरी
जाँ
पर
इश्क़
ग़ज़लों
की
तरह
पाबंदियों
में
होता
है
Prit
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फ़ुलाँ
औरत
किसी
के
इश्क़
में
पागल
हुई
कभी
तुमने
सुना
क्या
क्योंकि
ये
मुमकिन
नहीं
Prit
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तेरे
दिल
को
मैं
ने
जन्नत
समझा
था
पर
लोग
वहाँ
ज़्यादा
थे,
वो
था
एक
जहन्नम
Prit
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हाल
क्या
कहिए
गुलशन
ए
दिल
का
यहाँ
बारिश
भी
रेत
जैसी
है
Prit
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शायद
उसने
कभी
वफ़ा
की
ही
नइँ
जो
ये
कहता
है
आँखें
बोलती
नइँ
किसी
पे
इक
दफ़ा
दिल
आ
जाए
बंदा
क्या
फिर
तो
रब
की
चलती
नइँ
तेरी
ख़ामोशी
भी
सुनी
मैं
ने
तू
ने
आवाज़
भी
मेरी
सुनी
नइँ
घर
से
दफ़्तर
तलक
सफ़र
है
सिर्फ़
मौत
है
जानी
फिर
ये
ज़िंदगी
नइँ
उसको
कैसे
बुरी
लगी
मेरी
बात
बात
भी
वो
कभी
जो
मैं
ने
की
नइँ
उसे
बिन
देखें
देख
लेते
हैं
हम
वो
हमें
देखकर
भी
देखती
नइँ
आप
कुछ
ज़्यादा
अपने
आप
से
हैं
वरना
मुझ
में
तो
कोई
भी
कमी
नइँ
कभी
चुप
रह
के
कितना
कहती
है
कभी
वो
बोलकर
भी
बोलती
नइँ
'प्रीत'
आज़ादी
ऐसी
जैसे
हो
क़ैद
क़ैद
ऐसी
जहाँ
गिरफ़्तगी
नइँ
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Prit
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