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Prit
haal kya kahiye gulshan ae dil ka
haal kya kahiye gulshan ae dil ka | हाल क्या कहिए गुलशन ए दिल का
- Prit
हाल
क्या
कहिए
गुलशन
ए
दिल
का
यहाँ
बारिश
भी
रेत
जैसी
है
- Prit
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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उस
ने
बारिश
में
भी
खिड़की
खोल
के
देखा
नहीं
भीगने
वालों
को
कल
क्या
क्या
परेशानी
हुई
Jamal Ehsani
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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ऐ
आसमान
तेरी
इनायत
बजा
मगर
फ़स्लें
पकी
हुई
हों
तो
बारिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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तुझे
करनी
है
तो
मुसावात
कर
कि
बेहतर
हमारे
भी
हालात
कर
मिटा
दिल
में
बनते
ये
सहराओं
को
ख़ुदा
अपने
बन्दों
पे
बरसात
कर
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Siddharth Saaz
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मैं
कि
काग़ज़
की
एक
कश्ती
हूँ
पहली
बारिश
ही
आख़िरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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वो
ग़ुस्से
में
सीधी
बात
नहीं
करता
तूफ़ानों
में
बारिश
तिरछी
होती
है
Ankit Maurya
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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आसमाँ
से
गरज
छेड़ती
है
हमें
एक
बारिश
में
भी
भीगे
थे
साथ
हम
Parul Singh "Noor"
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छोड़ना
लाज़मी
था
उसको
"प्रीत"
पंछी
कब
इक
शजर
का
होता
है
Prit
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तेरी
परछाई
को
अपनी
निगाहों
में
बसाया
है
कमाई
दौलतें
हैं
मेरी
जो
तेरी
मुहब्बत
है
Prit
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उसने
उलझा
दिया
मोहब्बत
में
वरना
हम
और
जीना
चाहते
थे
Prit
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तेरे
हिज्र
में
दिन
कुछ
ऐसे
कटे
हैं
तड़पता
हुआ
कोई
मरता
हो
जैसे
तू
मिल
तुझको
ऐसे
गले
से
लगाऊँ
समुंदर
में
दरिया
उतरता
हो
जैसे
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Prit
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क्यूँ
ज़ुलेखा
ने
चाक
कर
डाला
क्योंकि
मीरा
से
मिलने
नइँ
आए
Prit
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