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Prit
tum nazm si azaad rahna chahti ho meri jaañ
tum nazm si azaad rahna chahti ho meri jaañ | तुम नज़्म सी आज़ाद रहना चाहती हो मेरी जाँ
- Prit
तुम
नज़्म
सी
आज़ाद
रहना
चाहती
हो
मेरी
जाँ
पर
इश्क़
ग़ज़लों
की
तरह
पाबंदियों
में
होता
है
- Prit
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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जनाज़े
पर
मेरे
लिख
देना
यारों
मोहब्बत
करने
वाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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अगर
बेदाग़
होता
चाँद
तो
अच्छा
नहीं
लगता
मोहब्बत
ख़ूब-सूरत
दाग़
है,
बेदाग़
से
दिल
पर
Umesh Maurya
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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ये
मोहब्बत
के
महल
तामीर
करना
छोड़
दे
मैं
भी
शहज़ादा
नहीं
हूँ
तू
भी
शहज़ादी
नहीं
Afzal Khan
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"प्रीत"
ये
इश्क़
की
इक
ही
रीत
जितना
हारे,
तेरी
उतनी
जीत
Prit
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अजब
सी
कैफ़ियत
दो
चार
करता
है
बड़ी
नफ़रत
से
जब
वो
प्यार
करता
है
Prit
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तूने
मुझपे
बहुत
सितम
ढाए
सो
मेरी
उम्र
तुझको
लग
जाए
दिल
की
हालत
बिगाड़
दी
मैंने
कौन
कम-ज़र्फ़
पर
तरस
खाए
गुज़रे
दिन
जो
गुज़र
गया
सदा
को
कहो
उस
सेे
कि
घर
को
लौट
आए
कौन
शायर
से
इश्क़
कर
बैठा
किसने
सहरा
में
अब्र
बरसाए
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Prit
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पहले
मूरत
में
प्राण
डाले
फिर
आदमी
आप
हो
गया
पत्थर
Prit
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मुझ
सेे
ये
मत
पूछ
कि
मैं
कितना
तन्हा
हूँ
तन्हाई
भी
साथ
नहीं
इतना
तन्हा
हूँ
Prit
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