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Prit
preet ye ishq ki ik hi reet
preet ye ishq ki ik hi reet | "प्रीत" ये इश्क़ की इक ही रीत
- Prit
"प्रीत"
ये
इश्क़
की
इक
ही
रीत
जितना
हारे,
तेरी
उतनी
जीत
- Prit
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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लिखी
होगी
मोहब्बत
जिन
सफ़ों
पर
मेरा
दावा
है
वो
नम
ही
मिलेंगे
किसी
दिन
ऊब
जाओगे
सभी
से
तुम्हें
उस
रोज़
फिर
हम
ही
मिलेंगे
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Ritesh Rajwada
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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ये
मोहब्बत
के
महल
तामीर
करना
छोड़
दे
मैं
भी
शहज़ादा
नहीं
हूँ
तू
भी
शहज़ादी
नहीं
Afzal Khan
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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ज़रा
सी
बात
तू
समझ
सकी
नहीं
वो
ज़िंदगी
में
है,
वो
ज़िंदगी
नहीं
मैं
मर
गया,
मेरी
वफ़ा
मरी
नहीं
ये
आग
तो
बुझाने
से
बुझी
नहीं
चढ़ाव
उतार
उस
बदन
के
पढ़
लिए
वो
बुक
जो
पढ़नी
चाहिए,
पढ़ी
नहीं
वो
हाथ
तक
तो
आई,
मुँह
नहीं
लगी
जो
मेरे
साथ
थी,
मेरी
हुई
नहीं
कुछ
इस
तरह
हमारा
रब्त
टूटा
था
अमीर
की
फ़क़ीर
से
बनी
नहीं
मैं
एक
हश्र
था,
जो
उसपे
बरपा
था
वो
मेरे
बाद
चैन
से
रही
नहीं
तू
मेरे
जैसा
कोई
एक
ढूँढ़
ला
जो
तेरा
हो
मगर
तेरा
हो
भी
नहीं
ग़म
ए
फ़िराक
में
नया
बदन
चखा
नई
शराब
भी
हज़म
हुई
नहीं
वे
लोग
मर
गए
जो
मुझ
पे
मरते
थे
तू
धोखा
दे
गई,
सो
तू
मरी
नहीं
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Prit
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मेरे
नाम
से
उसने
नाम
उसका
कुछ
ऐसे
बदला
जैसे
भाड़ा
ज़्यादा
मिलने
पर
किराएदार
बदल
दिए
जाते
हों
Prit
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वस्ल
का
एक
दिन
है
उस
पर
भी
हिज्र
तारी
है
हिज्र
तारी
है
Prit
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सफ़र
है
ज़िंदगी
और
इसकी
मंज़िल
मौत
है
सफ़र
में
मौत
हो
जाती
तो
बढ़िया
होता
"प्रीत"
Prit
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जितनी
जल्दी
फ़िदा
हो
जाते
हैं
उतनी
जल्दी
जुदा
हो
जाते
हैं
मैं
तो
पत्थर
भी
हो
नहीं
पाता
लोग
कैसे
ख़ुदा
हो
जाते
हैं
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Prit
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