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Prit
padhaai ham bhi karna chahte hain par
padhaai ham bhi karna chahte hain par | पढ़ाई हम भी करना चाहते हैं पर
- Prit
पढ़ाई
हम
भी
करना
चाहते
हैं
पर
तेरी
यादों
से
फ़ुर्सत
ही
नहीं
मिलती
- Prit
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तुम
से
छुट
कर
भी
तुम्हें
भूलना
आसान
न
था
तुम
को
ही
याद
किया
तुम
को
भुलाने
के
लिए
Nida Fazli
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़ख़्म
लगे
हैं
कितने
दिल
पर
याद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
शाद
नहीं
हूँ
मैं
तुमको
नाशाद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
उम्र
गए
पे
तेरी
सूरत
और
मिरी
आँखें
टकराईं
उम्र
गए
में
सोची
वो
फ़रियाद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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याद
उसे
इंतिहाई
करते
हैं
सो
हम
उस
की
बुराई
करते
हैं
Jaun Elia
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जब
बुलंदी
का
गुमाँ
था
तो
नहीं
याद
आई
अपनी
परवाज़
से
टूटे
तो
ज़मीं
याद
आई
वही
आँखें
कि
जो
ईमान-शिकन
आँखें
हैं
उन्हीं
आँखों
की
हमें
दावत-ए-दीं
याद
आई
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Subhan Asad
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लौट
कर
नहीं
आता
कब्र
से
कोई
लेकिन
प्यार
करने
वालों
को
इंतज़ार
रहता
है
Shabeena Adeeb
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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इसलिए
भी
मैं
देर
से
पहुँचा
लौट
कर
जल्दी
जाना
था
मुझको
Prit
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जैसे
सरताज
मैं
भी
वैसी
हूँ
प्रीत
तो
वो
हैं
मैं
तो
प्रीती
हूँ
दिल
को
सरताज
कर
लिया
मैंने
आप
को
हार
उनको
जीती
हूँ
और
कोई
भी
रंग
जँचता
नहीं
जब
से
सरताज
रंग
रंगी
हूँ
नज़्म
सरताज
ने
सिखाई
और
शाह
बुल्ले
से
इश्क़
सीखी
हूँ
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Prit
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तू
सिर्फ़
इश्क़
ही
नहीं,
मेरी
दु'आ
भी
था
लगता
है
इसलिए
तू
मुकम्मल
हुआ
नहीं
Prit
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गुज़रे
बरस
मैं
ने
उसे
चूमा
था
पहली
बार
इस
बार
भी
मुझे
तो
वही
साल
लौटा
दो
Prit
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हृदय
की
भूमि
पर
तू
प्रेम
बरसा
दे
धुआँ
सा
जो
उठा
है
दिल
में,
थम
जाए
Prit
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