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Prit
hararat kar koi main tere dil men ghar banaa luun phir
hararat kar koi main tere dil men ghar banaa luun phir | हरारत कर कोई, मैं तेरे दिल में घर बना लूँ फिर
- Prit
हरारत
कर
कोई,
मैं
तेरे
दिल
में
घर
बना
लूँ
फिर
तेरी
आँखें,
तेरी
मुस्कान,
तेरा
दिल
संवारूँ
फिर
कभी
बे
पैरहन
जब
तू
मेरे
आग़ोश
में
आए
गले
लगकर
मैं,
तेरे
जिस्म
का
नक़्शा
उतारूँ
फिर
- Prit
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ख़याल
कब
से
छुपा
के
ये
मन
में
रक्खा
है
मिरा
क़रार
तुम्हारे
बदन
में
रक्खा
है
Siraj Faisal Khan
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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इसी
कारण
से
मैं
उसका
बदन
छूता
नहीं
यारों
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
में
वो
लिक्खा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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इश्क़
को
पूछता
नहीं
कोई
हुस्न
का
एहतिराम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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गूँजता
है
बदन
में
सन्नाटा
कोई
ख़ाली
मकान
हो
जैसे
Aanis Moin
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हुस्न
जब
मेहरबाँ
हो
तो
क्या
कीजिए
इश्क़
के
मग़्फ़िरत
की
दु'आ
कीजिए
Khumar Barabankvi
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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बदन
का
ज़िक्र
बातिल
है
तो
आओ
बिना
सर
पैर
की
बातें
करेंगे
Fahmi Badayuni
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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तेरे
हिज्र
में
दिन
कुछ
ऐसे
कटे
हैं
तड़पता
हुआ
कोई
मरता
हो
जैसे
तू
मिल
तुझको
ऐसे
गले
से
लगाऊँ
समुंदर
में
दरिया
उतरता
हो
जैसे
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Prit
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तेरे
जैसा
बना
मुझको
दग़ाबाज़ी
में
माहिर
कर
Prit
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यहाँ
सब
मेरे
दोस्त
हैं
यानी
यहाँ
कोई
भी
मेरा
दोस्त
नहीं
Prit
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उसका
बोसा
लिया
तो
ये
जाना
चाय
से
ज़्यादा
मीठा
भी
कुछ
है
Prit
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मेरे
आने
से
कितने
ख़ुश
हैं
वो
रस्ते
में
काँटे
जो
बिछाते
हैं
Prit
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