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Prit
saaqi koi sharaab aisi de
saaqi koi sharaab aisi de | साक़ी कोई शराब ऐसी दे
- Prit
साक़ी
कोई
शराब
ऐसी
दे
जो
मेरा
ग़म
समेटकर
ख़ुशी
दे
इश्क़
ऐसी
अजीब
शय
है
जो
बंदे
का
क़त्ल
कर
के
ज़िंदगी
दे
हुस्न
पर
मरने
वालों
तुमको
ख़ुदा
इक
निहायत
हसीन
बेटी
दे
कोई
इंसान
दे
नहीं
सकता
'प्रीत'
को
जितनी
खुशियाँ
'चैरी'
दे
- Prit
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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ग़ज़ब
का
इश्क़
है,
हर
कोई
हैराँ
है
कि
तेरे
ख़्वाब
मेरी
आँखों
को
तरसें
Prit
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कोई
बोले
तूने
कमाया
ही
क्या
है
मेरे
पापा
मेरी
तरफ़
देखते
हैं
Prit
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उसके
दिल
से
निकालने
पर
क्या
शिकवा
करना
मुझको
बचपन
से
बाहर
रहने
की
आदत
है
Prit
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घर
की
हालत
ने
कर
दिया
दाना
वरना
मैं
भी
बला
का
पागल
था
Prit
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मीठी
मुरली
सुनाओ
कान्हा
जी
प्रीत
का
गीत
गाओ
कान्हा
जी
मैं
ने
भी
प्रेम
रोग
पालना
है
राधिका
सी
मिलाओ
कान्हा
जी
सारे
कौरव
रक़ीब
बन
आए
प्रेम
रण
में
जिताओ
कान्हा
जी
धूर्त
ग़ज़लें
कहाँ
समझते
हैं
अब
सुदर्शन
चलाओ
कान्हा
जी
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Prit
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