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Prit
gazab ka ishq hai har koi hairaan hai
gazab ka ishq hai har koi hairaan hai | ग़ज़ब का इश्क़ है, हर कोई हैराँ है
- Prit
ग़ज़ब
का
इश्क़
है,
हर
कोई
हैराँ
है
कि
तेरे
ख़्वाब
मेरी
आँखों
को
तरसें
- Prit
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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ये
मोहब्बत
के
महल
तामीर
करना
छोड़
दे
मैं
भी
शहज़ादा
नहीं
हूँ
तू
भी
शहज़ादी
नहीं
Afzal Khan
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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मेरी
तन्हाई
देखेंगे
तो
हैरत
ही
करेंगे
लोग
मोहब्बत
छोड़
देंगे
या
मोहब्बत
ही
करेंगे
लोग
Ismail Raaz
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इश्क़
को
एक
उम्र
चाहिए
और
उम्र
का
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jigar Barelvi
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उन
का
जो
फ़र्ज़
है
वो
अहल-ए-सियासत
जानें
मेरा
पैग़ाम
मोहब्बत
है
जहाँ
तक
पहुँचे
Jigar Moradabadi
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इश्क़
तिरी
इंतिहा
इश्क़
मिरी
इंतिहा
तू
भी
अभी
ना-तमाम
मैं
भी
अभी
ना-तमाम
Allama Iqbal
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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तू
मेरा
हो
के
भी
कौन
सा
मेरा
था
तुझ
से
यानी
मेरी
कोई
फ़ुर्क़त
नहीं
Prit
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उसके
दिल
में
नाम
अपना
ढूँढता
हूँ
यानी
मैं
सहरा
में
दरिया
ढूँढता
हूँ
Prit
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एक
भी
दिल
नहीं
तोड़
पाया
कभी
तू
सुख़न-वर
नहीं
तुझपे
लानत
है
प्रीत
Prit
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तल्ख़
मौसम
में
मीठी
बातें
कर
चाय
में
जैसे
चीनी
बातें
कर
टूटने
को
है
सच्चा
इश्क़
अपना
जोड़े
रखने
को
झूठी
बातें
कर
आज
कल
मन
उदास
रहता
है
थोड़े
दिन
तक
हवस
की
बातें
कर
मुझको
दुनिया
से
कोई
मतलब
नइँ
मेरे
महबूब
ख़ुद
की
बातें
कर
गुफ़्तुगू
अपनी
सुनने
वालों
को
शर्म
आ
जाए
वैसी
बातें
कर
ग़ज़लें
लिख
कर
रिझाना
है
तुझको
रूठ
जा
मुझ
सेे
कड़वी
बातें
कर
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Prit
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थोड़ा
उलझे
मसाइल-ए-दिल
में
कुछ
परेशाँ
दिमाग़
ने
किया
था
रात
से
जंग
जीत
जाते
मगर
ये
अँधेरा
चराग़
ने
किया
था
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Prit
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