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Prit
jab maazi markaz men aa jaata hai
jab maazi markaz men aa jaata hai | जब माज़ी मरकज़ में आ जाता है
- Prit
जब
माज़ी
मरकज़
में
आ
जाता
है
अच्छा
ख़ासा
रिश्ता
खा
जाता
है
जब
भी
सितारे
गर्दिश
में
होते
हैं
एक
दिया
सूरज
को
खा
जाता
है
या
तो
ज़ाती
मसाइल
होते
हैं
प्रीत
या
फिर
पैसा
बीच
में
आ
जाता
है
- Prit
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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कौन
सी
दीवार
है
मौजूद
इस
रिश्ते
में
'साज़'
क्यूँँ
नहीं
रो
सकते
हम
अपने
पिता
के
सामने
Siddharth Saaz
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तू
समझता
है
कि
रिश्तों
कि
दुहाई
देंगे
अरे
हम
तो
वो
हैं
तेरे
चेहरे
से
दिखाई
देंगे
Waseem Barelvi
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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उसके
बदन
को
दी
नुमूद
हमने
सुखन
में
और
फिर
उसके
बदन
के
वास्ते
इक
क़बा़
भी
सी
गई
Jaun Elia
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ले
आता
हूँ
हर
रिश्ते
को
झगड़े
तक
फिर
झगड़े
से
काम
चलाता
रहता
हूँ
Shariq Kaifi
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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रिश्तों
की
दलदल
से
कैसे
निकलेंगे
हर
साज़िश
के
पीछे
अपने
निकलेंगे
Shakeel Jamali
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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अगर
मैं
सच
कहूँ
अल्लाह
क़सम,
इतनी
मोहब्बत
मैं
किसी
पत्थर
को
करता
तो
वो
पत्थर
भी
पिघल
जाता
Prit
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इतनी
पाकीज़गी
से
इश्क़
किया
जिस
सेे
था
उसको
तक
ख़बर
न
हुई
Prit
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हरारत
कर
कोई,
मैं
तेरे
दिल
में
घर
बना
लूँ
फिर
तेरी
आँखें,
तेरी
मुस्कान,
तेरा
दिल
संवारूँ
फिर
कभी
बे
पैरहन
जब
तू
मेरे
आग़ोश
में
आए
गले
लगकर
मैं,
तेरे
जिस्म
का
नक़्शा
उतारूँ
फिर
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Prit
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आज
तो
ख़ुदा
को
भी
बेनक़ाब
करना
है
रे,
उसे
बुलाओ,
उसका
हिसाब
करना
है
आब-ए-चश्म
को
अपने
बहा
के
सागर
में
आज
तो
मुझे
सागर
को
शराब
करना
है
छीनकर
काँसा
उसको
अपना
ताज
देकर
के
उस
फ़कीर
को
भी
मैने
नवाब
करना
है
शा'इरी
बना
कर
सब
को
सुना
के
ऐसे
ही
"प्रीत"
हर
शख़्स
को
मैंने
गुलाब
करना
है
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Prit
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इश्क़
उस
वक़्त
बाज़ी
जीत
गया
हार
का
हार
पहना
जब
दिल
ने
Prit
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