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Prit
aaj to KHuda ko bhi benaqab karna hai
aaj to KHuda ko bhi benaqab karna hai | आज तो ख़ुदा को भी बेनक़ाब करना है
- Prit
आज
तो
ख़ुदा
को
भी
बेनक़ाब
करना
है
रे,
उसे
बुलाओ,
उसका
हिसाब
करना
है
आब-ए-चश्म
को
अपने
बहा
के
सागर
में
आज
तो
मुझे
सागर
को
शराब
करना
है
छीनकर
काँसा
उसको
अपना
ताज
देकर
के
उस
फ़कीर
को
भी
मैने
नवाब
करना
है
शा'इरी
बना
कर
सब
को
सुना
के
ऐसे
ही
"प्रीत"
हर
शख़्स
को
मैंने
गुलाब
करना
है
- Prit
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तू
उस
निगाह
से
पी
वक़्त-ए-मय-कशी
'ताबाँ'
की
जिस
निगाह
पे
क़ुर्बान
पारसाई
हो
Anwar Taban
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अब
तो
उतनी
भी
मुयस्सर
नहीं
मय-ख़ाने
में
जितनी
हम
छोड़
दिया
करते
थे
पैमाने
में
Divakar Rahi
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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मेरे
आँसू
नहीं
थम
रहे
कि
वो
मुझ
सेे
जुदा
हो
गया
और
तुम
कह
रहे
हो
कि
छोड़ो
अब
ऐसा
भी
क्या
हो
गया
मय-कदों
में
मेरी
लाइनें
पढ़ते
फिरते
हैं
लोग
मैंने
जो
कुछ
भी
पी
कर
कहा
फ़लसफ़ा
हो
गया
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Tehzeeb Hafi
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प्रेम
की
गली
में
सब
शराब
लेकर
आए
थे
हम
बहुत
ख़राब
थे
किताब
लेकर
आए
थे
Aman Akshar
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तुम्हारी
आँखों
की
तौहीन
है
ज़रा
सोचो
तुम्हारा
चाहने
वाला
शराब
पीता
है
Munawwar Rana
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हक़ीक़तों
की
तल्ख़ियाँ
भी
मीठे
ख़्वाब
की
तरह
मुझे
शराब
दे
रही
है
वो
गुलाब
की
तरह
Rachit Sonkar
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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उसे
चाहने
भर
से
मेरा
हो
जाए
परिंदा
है
कब
किस
शज़र
का
हो
जाए
Prit
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'प्रीत'
जिस
तिस
बहाने
कर
भी
ले
एक
तितली
से
बात
फूलों
की
Prit
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तेरे
हिज्र
में
मेरा
मरना
भी
तय
है
बिना
पानी
के
कौन
ज़िंदा
बचा
है
Prit
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तेरी
परछाई
को
अपनी
निगाहों
में
बसाया
है
कमाई
दौलतें
हैं
मेरी
जो
तेरी
मुहब्बत
है
Prit
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हुस्न
की
इक
परी
है
जान
मेरी
सो
रक़ीब
आसमान
है
मेरा
Prit
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