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Prit
hamne ye kya dekha hai
hamne ye kya dekha hai | हमने ये क्या देखा है
- Prit
हमने
ये
क्या
देखा
है
बादल
प्यासा
देखा
है
तुमने
रोटी
खाई
है
हमने
चूल्हा
देखा
है
जिसको
दुनिया
कहा
उसको
दुनिया
जैसा
देखा
है
पानी
के
नाम
पे
हमने
सिर्फ़
ख़ाली
मटका
देखा
है
आज
ख़ुदास
मिलना
था
उसको
आता
देखा
है
दरिया
की
क़ीमत
वो
जाने
जिसने
सहरा
देखा
है
- Prit
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जल
बुझूँगा
भड़क
के
दम
भर
में
मैं
हूँ
गोया
दिया
दिवाली
का
Nadir Shahjahanpuri
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आँख
वो
इक
शहर
जिस
में
दम
घुटेगा
दिल
में
रहना
घर
में
रहने
की
तरह
है
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Neeraj Neer
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रोते
बच्चे
पूछ
रहे
हैं
मम्मी
से
कितना
पानी
और
मिलाया
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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गिले
शिकवे
ज़रूरी
हैं
अगर
सच्ची
मुहब्बत
है
जहाँ
पानी
बहुत
गहरा
हो
थोड़ी
काई
रहती
है
Munawwar Rana
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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मेरी
तक़दीर
में
जलना
है
तो
जल
जाऊँगा
तेरा
वा'दा
तो
नहीं
हूँ
जो
बदल
जाऊँगा
Sahir Ludhianvi
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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तेरे
चुप
रहने
से
हर
पौधा
सूख
गया
है
तुझको
मालूम
नहीं
पौधों
का
पानी
है
तू
Kabir Altamash
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साथ
निकले
थे
मैं
और
मैं
दोनों
ही
फिर
न
जाने
ख़ुदा,
मैं
कहाँ
रह
गया
Prit
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तेरे
हिज्र
में
दिन
कुछ
ऐसे
कटे
हैं
तड़पता
हुआ
कोई
मरता
हो
जैसे
तू
मिल
तुझको
ऐसे
गले
से
लगाऊँ
समुंदर
में
दरिया
उतरता
हो
जैसे
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Prit
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मैं
सहरा
था
वो
बारिश
थी
वो
बरसे
ऐसी
ख़्वाहिश
थी
वो
बरसी
फिर
सैलाब
आया
और
अब
बचने
की
गुंजाइश
थी
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Prit
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तुम
वहाँ
कभी
जो
बीमार
होते
हो
जानाँ
हालतें
यहाँ
मेरी
भी
ख़राब
होती
हैं
Prit
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उसका
बोसा
लिया
तो
ये
जाना
चाय
से
ज़्यादा
मीठा
भी
कुछ
है
Prit
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